लखनऊ, विशेष रिपोर्ट,चौथा प्रहरी।
Yogi Adityanath सरकार में संभावित विस्तार की चर्चा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा फेरबदल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में हुई शीर्ष स्तर की बैठकों के बाद प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और भाजपा संगठन में व्यापक बदलाव की तैयारी शुरू हो चुकी है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले एक महीने के भीतर न केवल कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है, बल्कि संगठन की नई टीम भी घोषित की जा सकती है।
तीसरे डिप्टी सीएम पर सबसे ज्यादा चर्चा
वर्तमान में प्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार तीसरे उपमुख्यमंत्री पद को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह फैसला होता है तो इसका सीधा मकसद क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधना होगा।
विशेष रूप से ब्राह्मण वर्ग को साधने की रणनीति पर पार्टी गंभीरता से विचार कर सकती है। यह कदम 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले सामाजिक समीकरण मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव संभव
Bharatiya Janata Party के प्रदेश संगठन में भी व्यापक फेरबदल की तैयारी बताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार:
जिला इकाइयों में बदलाव
क्षेत्रीय अध्यक्षों की जिम्मेदारी में फेरबदल
प्रदेश टीम में नई नियुक्तियां
कुछ पुराने पदाधिकारियों की छुट्टी
संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल और चुनावी रणनीति को मजबूत करने के उद्देश्य से यह बदलाव किए जा सकते हैं।
मंत्रिमंडल में किन्हें मिल सकता है मौका?
संभावित विस्तार में:
कुछ सक्रिय विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है
संगठन में लंबे समय से काम कर रहे पदाधिकारियों को मौका मिल सकता है
क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर नए चेहरे जोड़े जा सकते हैं
कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी संभव बताई जा रही है
यह संकेत है कि प्रदर्शन, सामाजिक समीकरण और राजनीतिक रणनीति—तीनों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषण: क्यों जरूरी है यह फेरबदल?
1️⃣ 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी
2️⃣ लोकसभा चुनाव के बाद नई रणनीतिक पुनर्संरचना
3️⃣ जातीय-सामाजिक संतुलन साधने की जरूरत
4️⃣ संगठन और सरकार के बीच समन्वय मजबूत करना
यदि तीसरे डिप्टी सीएम की नियुक्ति होती है, तो यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा संदेश होगा।
चौथा प्रहरी विश्लेषण
उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा सामाजिक समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में यदि ब्राह्मण वर्ग को साधने या क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए बड़ा फैसला होता है, तो यह आने वाले चुनावी परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन राजनीतिक हलचल यह संकेत दे रही है कि आने वाला महीना उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।
Author: Chautha Prahari
Vinay Prakash Singh Editor in Chief M.N0- 9454215946 Registration NO. UDYAM -UP-24-0043854





