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चेहरा पहचान प्रणाली से आंगनबाड़ी में बड़ा बदलाव: 81 लाख लाभार्थियों तक पहुंचा पुष्टाहार

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Anganwadi worker distributing nutrition to children and women in India

लखनऊ, 17 मार्च। उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से वितरित किए जाने वाले अनुपूरक पुष्टाहार को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए लागू की गई चेहरा पहचान प्रणाली (Face Recognition System – FRS) के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। डिजिटल तकनीक के इस प्रयोग ने न केवल वितरण प्रक्रिया को मजबूत किया है, बल्कि फर्जीवाड़े पर भी प्रभावी रोक लगाई है।

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सीएम योगी का फाइल फोटो

फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के लगभग 1 करोड़ लाभार्थियों में से करीब 81 लाख लोगों तक इस प्रणाली के माध्यम से पुष्टाहार पहुंचाया गया। यह कुल लाभार्थियों का लगभग 81 प्रतिशत है, जो कि एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश में एफआरएस प्रणाली को अपनाया गया है। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पोषण का लाभ केवल वास्तविक लाभार्थियों तक ही पहुंचे। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में इस प्रणाली के जरिए 100 प्रतिशत वितरण का लक्ष्य हासिल किया जाएगा।
प्रदेश में अनुपूरक पुष्टाहार योजना के अंतर्गत छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को पोषण सामग्री प्रदान की जाती है। पहले जहां वितरण प्रणाली में गड़बड़ियों और फर्जी लाभार्थियों की शिकायतें सामने आती थीं, वहीं अब फेस रिकॉग्निशन तकनीक के उपयोग से इन समस्याओं में काफी कमी आई है।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने भी इस डिजिटल प्रणाली को तेजी से अपनाया है। स्मार्टफोन और ऐप आधारित तकनीक के माध्यम से लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित की जा रही है, जिससे वितरण प्रक्रिया अधिक सटीक और विश्वसनीय बनी है।
सरकार की ओर से पोषण योजनाओं का दायरा भी लगातार बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश के आठ जनपदों में किशोरियों को भी अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जा रहा है। यह पहल किशोरियों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मार्च माह में एफआरएस प्रणाली के माध्यम से वितरण का प्रतिशत फरवरी की तुलना में और अधिक बढ़ने की संभावना है। डिजिटल निगरानी और तकनीकी सुधारों के चलते योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी और पारदर्शी हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह तकनीक का उपयोग सामाजिक योजनाओं में किया जाता रहा, तो न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में भी सफलता मिलेगी।
उत्तर प्रदेश में एफआरएस आधारित पुष्टाहार वितरण मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है, जहां तकनीक के जरिए सामाजिक कल्याण योजनाओं को मजबूत किया जा सकता है।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

Vinay Prakash Singh Editor in Chief M.N0- 9454215946 Registration NO. UDYAM -UP-24-0043854

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