अयोध्या।श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर गुरूवार को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन संपन्न हुआ। सनातन नव संवत्सर (विक्रम संवत 2083) के प्रथम दिवस पर मंदिर परिसर में पूज्य संतों की उपस्थिति में श्रीराम यंत्र की विधिवत प्रतिष्ठापना की गई। यह आयोजन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है और देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

सुबह 10:30 बजे प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठानों के साथ श्रीराम यंत्र की स्थापना की गई। इस दौरान संत-महात्माओं, आचार्यों और मंदिर से जुड़े प्रमुख लोगों की गरिमामयी उपस्थिति रही। पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत नजर आया।
चैत्र नवरात्रि का पहला दिन हिंदू धर्म में नए वर्ष की शुरुआत का प्रतीक होता है। इसी शुभ अवसर पर श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना को अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यंत्र की स्थापना से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मंदिर परिसर में आध्यात्मिक शक्ति का विस्तार होता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित संतों ने कहा कि श्रीराम यंत्र की स्थापना केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। इससे श्रद्धालुओं की आस्था और अधिक मजबूत होगी और मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा में वृद्धि होगी।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी मंदिर परिसर में उपस्थित रहे और उन्होंने इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनकर स्वयं को धन्य महसूस किया। सुरक्षा व्यवस्था और आयोजन प्रबंधन भी उच्च स्तर का देखने को मिला, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।
अयोध्या में लगातार हो रहे धार्मिक आयोजनों के चलते यह नगरी एक बार फिर देश और दुनिया के धार्मिक मानचित्र पर प्रमुखता से उभर रही है। श्रीराम मंदिर में इस प्रकार के आयोजनों से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
इस भव्य आयोजन का सीधा प्रसारण भी किया गया, जिससे देश-विदेश में बैठे श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण से जुड़ सके।
Author: Chautha Prahari
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