लखनऊ। गोमतीनगर स्थित सहारा सिटी को खाली कराने की प्रक्रिया तेज हो गई है और अब यह पूरा इलाका प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में आ गया है। पिछले कई दिनों से परिसर के अंदर ट्रकों और अन्य वाहनों की लगातार आवाजाही देखी जा रही है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि सहारा सिटी को पूरी तरह खाली कराया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, सहारा समूह के दिवंगत प्रमुख सुब्रत रॉय की पत्नी स्वप्ना राय भी अपनी कोठी ‘स्वप्ना कुटी’ (जिसे व्हाइट हाउस कहा जाता है) से कीमती सामान बाहर भिजवा रही हैं। फर्नीचर, गहने, महंगी घड़ियां, वाहन, लॉकर और अन्य घरेलू सामग्री को तेजी से शिफ्ट किया जा रहा है।
प्रशासन ने सख्त निर्देश दिए हैं कि एक बार जो सामान परिसर से बाहर चला जाएगा, उसे दोबारा अंदर नहीं लाया जा सकेगा। इसके साथ ही सहारा प्रबंधन से जुड़े लोगों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है। यह पूरी कार्रवाई लखनऊ नगर निगम के आदेश पर की जा रही है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सहारा सिटी की लीज समाप्त करने के फैसले को सही ठहराते हुए इस जमीन को नगर निगम को सौंपने का आदेश दिया है। 16 मार्च को शीर्ष अदालत द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी।
इसी बीच, सहारा सिटी में करोड़ों रुपये के सामान की चोरी का मामला भी सामने आया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चोरी में पिस्टल, कारतूस, महंगी घड़ियां, कैमरे, टीवी, मोबाइल फोन, वाहन और चांदी के बर्तन तक शामिल बताए जा रहे हैं।
इस मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों के गिरोह का पर्दाफाश किया है और चोरी का सामान भी बरामद किया है। जांच एजेंसियों को शक है कि इतनी बड़ी चोरी बिना अंदरूनी जानकारी के संभव नहीं थी, क्योंकि करीब 170 एकड़ में फैले इस विशाल परिसर में सामान की सटीक लोकेशन बाहरी व्यक्ति के लिए जान पाना आसान नहीं है।
नगर निगम और एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया है कि सील होने के बावजूद कुछ लोग रात के समय परिसर की रेकी कर रहे थे। हाल ही में अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ऐसे लोगों को कड़ी चेतावनी दी, जिसके बाद गतिविधियों में कमी आई है। हालांकि, अभी भी आशंका बनी हुई है कि कुछ लोग अंदर मौजूद सामान को ठिकाने लगाने की कोशिश कर सकते हैं।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। सहायक नगर आयुक्त ने परिसर में सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाने के लिए पत्र जारी किया है, ताकि चोरी की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
गौरतलब है कि सहारा सिटी की जमीन का विवाद काफी पुराना है। नगर निगम ने लीज की शर्तों के उल्लंघन और 30 वर्ष की अवधि पूरी होने के आधार पर 6 अक्टूबर को इस जमीन को अपने कब्जे में ले लिया था। इसके खिलाफ सहारा प्रबंधन ने पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन दोनों ही जगह से राहत नहीं मिली।
यह जमीन वर्ष 1994 में सहारा इंडिया हाउसिंग लिमिटेड को आवासीय योजना विकसित करने के लिए दी गई थी। योजना के तहत 130 एकड़ में कॉलोनी और 40 एकड़ में ग्रीन बेल्ट विकसित किया जाना था।
अब इस पूरी जमीन पर राज्य सरकार की नजर है और यहां नया विधानसभा भवन बनाने की योजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण को इस परियोजना का नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो डीपीआर और डिजाइन तैयार करने के लिए कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है।
Author: Chautha Prahari
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