वाराणसी, 3 अप्रैल। काशी की पावन धरती पर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित भव्य महानाट्य का आयोजन किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव विशेष रूप से शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आयोजन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि सम्राट विक्रमादित्य भारतीय संस्कृति और परंपरा के महानायक रहे हैं, जिनके जीवन पर आधारित यह महानाट्य केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि देश की समृद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि काशी की पावन भूमि पर इस नाट्य मंचन ने उज्जैन और काशी के बीच सांस्कृतिक एकता का सेतु स्थापित किया है।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारतीय कालगणना की नगरी उज्जैन और पंचांग निर्माण की नगरी काशी के संगम का प्रतीक है, जो भारत की प्राचीन समय-गणना प्रणाली को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए मध्य प्रदेश सरकार और आयोजन से जुड़े सभी कलाकारों की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने काशी और उज्जैन के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संबंधों को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार भगवान राम-लक्ष्मण और कृष्ण-बलराम की जोड़ियां भारतीय संस्कृति में आदर्श मानी जाती हैं, उसी प्रकार संत भर्तृहरि और सम्राट विक्रमादित्य की जोड़ी भी अत्यंत प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि जहां विक्रमादित्य की कर्मस्थली उज्जैन रही, वहीं संत भर्तृहरि की साधना स्थली काशी में गंगा तट के पार स्थित है।
मुख्यमंत्री योगी ने यह भी बताया कि चुनार किला संत भर्तृहरि के तप और आशीर्वाद का परिणाम माना जाता है, जिसका सौंदर्यीकरण और संरक्षण कार्य उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने के प्रयासों को भी महत्वपूर्ण बताया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहरों के पुनरुत्थान का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 के बाद से भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को वैश्विक पहचान मिली है। योग, आयुष और कुंभ जैसे आयोजनों को पूरी दुनिया ने अपनाया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की सहभागिता इसका प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और अयोध्या धाम के विकास कार्यों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं के कारण देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु हर वर्ष यहां आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या के पुनरुत्थान में भी सम्राट विक्रमादित्य की ऐतिहासिक भूमिका रही है, जिन्होंने लगभग 2000 वर्ष पूर्व अयोध्या नगरी की पुनः खोज की थी और भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण कराया था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस महानाट्य को नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपरा और आदर्शों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि नाटक, कला और सिनेमा समाज को दिशा देने की क्षमता रखते हैं और कलाकारों द्वारा निभाए गए सकारात्मक पात्र युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनते हैं।
उन्होंने फिल्म निर्माताओं से भी आग्रह किया कि वे सकारात्मक चरित्रों को ही नायक के रूप में प्रस्तुत करें, ताकि समाज में सही संदेश पहुंचे। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब नकारात्मक पात्रों को नायक के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसका प्रभाव समाज पर नकारात्मक पड़ा।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने इस भव्य आयोजन को भारतीय संस्कृति, पराक्रम, दानवीरता और सुशासन जैसे मूल्यों को पुनर्जीवित करने वाला बताया। उन्होंने इस पहल के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, संस्कृति विभाग और सभी कलाकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन देश की सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
Author: Chautha Prahari
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