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योगी कैबिनेट के बड़े फैसले: पीपीपी मॉडल पर 49 नए बस अड्डों को मंजूरी, 52 जनपद होंगे कवर

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PPP मॉडल पर बना आधुनिक बस अड्डा, एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं के साथ

(विनय प्रकाश सिंह)
लखनऊ,07 अप्रैल। योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में मंगलवार कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिनमें परिवहन विभाग से जुड़े फैसले सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। कुल 22 प्रस्ताव मंत्रिपरिषद के समक्ष पेश किए गए और सभी प्रस्तावों को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। इन फैसलों में सबसे बड़ा और जनहित से जुड़ा निर्णय प्रदेश में बस अड्डों के आधुनिकीकरण को लेकर लिया गया है। यह फैसला निश्चित रूप मिल का पत्थर साबित होगा।

कैबिनेट ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर 49 नए बस अड्डों के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की है। इससे पहले पहले चरण में 23 बस अड्डों के लिए एलओआई (Letter of Intent) जारी की जा चुकी थी। अब इस नए फैसले के साथ प्रदेश में कुल मिलाकर 52 जनपदों को आधुनिक बस अड्डों की सुविधा से जोड़ा जाएगा।

 PPP मॉडल पर बना आधुनिक बस अड्डा, एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं के साथ
सरकार की योजना के मुताबिक, ये नए बस अड्डे पारंपरिक बस स्टेशनों की तरह नहीं होंगे, बल्कि इन्हें एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यात्रियों को यहां अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें साफ-सफाई, डिजिटल टिकटिंग, वेटिंग लाउंज, फूड कोर्ट, शॉपिंग एरिया, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था शामिल होगी। इससे यात्रियों का सफर अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनेगा।
इसके अलावा, कैबिनेट ने विभिन्न जनपदों में बस अड्डों के निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। जनपद हाथरस के सिकंदराराऊ कस्बे में कृषि विभाग की 2 हेक्टेयर भूमि को निःशुल्क बस अड्डा निर्माण के लिए देने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया। इसी तरह बुलंदशहर के डिबाई क्षेत्र में सिंचाई विभाग की भूमि को बस अड्डा निर्माण हेतु हस्तांतरित करने पर भी सहमति बनी।
वहीं, बलरामपुर जिले के तुलसीपुर क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग (PWD) की भूमि को बस अड्डा निर्माण के लिए देने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिल गई है। इन फैसलों से साफ है कि सरकार प्रदेश के छोटे और मध्यम शहरों में भी यातायात सुविधाओं को मजबूत करने के लिए गंभीर है।
परिवहन विभाग के जानकारों का मानना है कि पीपीपी मॉडल पर बस अड्डों का निर्माण न केवल सरकारी संसाधनों पर बोझ कम करेगा, बल्कि निजी निवेश को भी बढ़ावा देगा। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
प्रदेश सरकार का यह कदम शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। आने वाले समय में इन आधुनिक बस अड्डों के जरिए यात्रियों को एक नया अनुभव मिलेगा, जो अब तक केवल एयरपोर्ट तक सीमित था।

योगी सरकार के इस फैसले से जहां एक ओर यात्रियों को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई पहचान भी मिलेगी। यह निर्णय उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की दिशा में एक मजबूत पहल माना जा रहा है।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

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