अयोध्या, 11 अप्रैल।रामनगरी अयोध्या में पर्यटन विकास के नाम पर शुरू की गई फूड कोर्ट परियोजनाओं पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। अयोध्या विकास प्राधिकरण द्वारा बकाया वसूली की कार्रवाई के तहत टेढ़ी बाजार स्थित “शबरी रसोई” को सील कर दिया गया है। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब संबंधित कंपनी पर करोड़ों रुपये का बकाया सामने आया है।
जानकारी के अनुसार, गुजरात की कवच ग्लोबल कनेक्ट प्राइवेट लिमिटेड को अयोध्या में कई प्रमुख स्थलों पर फूड कोर्ट संचालन का ठेका दिया गया था। कंपनी “शबरी रसोई” के अलावा गुप्तार घाट, सूर्यकुंड समेत कुल चार स्थानों पर फूड कोर्ट संचालित कर रही थी।

प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी पर कुल 3 करोड़ 69 लाख रुपये का बकाया हो गया है। इसमें अकेले टेढ़ी बाजार स्थित “शबरी रसोई” पर 1.57 करोड़ रुपये, गुप्तार घाट पर लगभग 95 लाख रुपये और सूर्यकुंड पर करीब 1.17 करोड़ रुपये की देनदारी शामिल है। बकाया भुगतान न होने के चलते प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाते हुए पहले चरण में “शबरी रसोई” को सील कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार, यदि जल्द ही बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया तो अन्य फूड कोर्ट्स पर भी इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है।
स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले ने स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों के बीच असंतोष को जन्म दिया है। गुप्तार घाट जैसे क्षेत्रों में वर्षों से छोटे दुकानदार चाय-पकौड़ी और स्थानीय खाद्य सामग्री बेचकर अपना जीवनयापन करते थे। लेकिन नई परियोजनाओं के तहत इन पारंपरिक दुकानों को हटाकर बड़े कॉर्पोरेट मॉडल को बढ़ावा दिया गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि फूड कोर्ट की दुकानों का आवंटन लगभग 80 लाख रुपये तक में किया गया, जो सामान्य व्यापारियों की पहुंच से बाहर है। इसको लेकर पहले भी कई मंचों पर सवाल उठ चुके हैं।
हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित “अयोध्या पर्व” में आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने भी इस मॉडल पर सवाल उठाते हुए कहा था कि “अयोध्या का आम व्यक्ति इतनी बड़ी राशि कहां से लाएगा?”
प्रशासनिक कार्रवाई और आगे की स्थिति
प्राधिकरण की ओर से स्पष्ट किया गया है कि बकाया वसूली के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि कंपनी को कई बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन भुगतान नहीं होने पर मजबूरन सीलिंग की कार्रवाई करनी पड़ी।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अयोध्या विकास प्राधिकरण पूरी बकाया राशि वसूल कर पाएगा या मामला किसी समझौते की ओर जाएगा।
बड़ा सवाल
यह मामला सिर्फ बकाया वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि अयोध्या के विकास मॉडल पर भी बहस छेड़ रहा है। क्या धार्मिक पर्यटन के नाम पर स्थानीय छोटे व्यापारियों को किनारे किया जा रहा है? क्या बड़े निवेशकों को प्राथमिकता देने से सामाजिक संतुलन प्रभावित हो रहा है?
इन सवालों के बीच “शबरी रसोई” का सील होना एक प्रतीकात्मक घटना बन गया है, जिसने विकास और जमीन से जुड़े लोगों के बीच की दूरी को उजागर कर दिया है।
अयोध्या में फूड कोर्ट संचालित करने वाली कवच कंपनी पर 3.69 करोड़ रुपये बकाया होने के बाद शबरी रसोई सील कर दी गई।
Author: Chautha Prahari
Registration NO. UDYAM -UP-24-0043854





