(विनय प्रकाश सिंह)
लखनऊ, 11 अप्रैल।उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को नई मजबूती देने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल अब ज़मीनी स्तर पर असर दिखा रही है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने एक बार फिर अपनी उपयोगिता साबित की है। इस योजना के अंतर्गत अलीगंज स्थित आदर्श पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र से तैयारी करने वाली 8 बेटियों ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) परीक्षा में सफलता हासिल कर अफसर बनने का सपना साकार किया है।

इन छात्राओं का चयन डिप्टी कलेक्टर, असिस्टेंट कमिश्नर (कमर्शियल टैक्स), नायब तहसीलदार और वर्क ऑफिसर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर हुआ है। यह उपलब्धि न केवल इन बेटियों के संघर्ष और मेहनत की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकार की योजनाएं सही दिशा में परिणाम दे रही हैं।
सफल अभ्यर्थियों में सोनम यादव (डिप्टी कलेक्टर), सृष्टि (असिस्टेंट कमिश्नर), खुशबू रानी (असिस्टेंट कमिश्नर), प्रगति वर्मा (असिस्टेंट कमिश्नर), मीनू रावत (असिस्टेंट कमिश्नर), प्रियंका वर्मा (नायब तहसीलदार), शालू राना (नायब तहसीलदार) और कीर्ति सागर (वर्क ऑफिसर) शामिल हैं। इन सभी ने अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों से निकलकर यह सफलता हासिल की है।
समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह के अनुसार, वर्ष 2024 बैच में कुल 130 छात्राओं ने परीक्षा दी थी, जिनमें से 8 ने सफलता प्राप्त की। उन्होंने बताया कि इस सफलता का श्रेय नियमित टेस्ट सीरीज, गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और सकारात्मक अध्ययन वातावरण को जाता है। अभ्युदय योजना के तहत छात्रों को निःशुल्क कोचिंग, आवास, भोजन और सुरक्षित माहौल जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राएं बिना किसी दबाव के तैयारी कर सकें।
अयोध्या की रहने वाली सोनम यादव, जिन्होंने डिप्टी कलेक्टर पद पर सफलता हासिल की, ने अपने दूसरे प्रयास में यह मुकाम पाया। उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय से हुई और परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अभ्युदय योजना से जुड़ने के बाद उन्हें सही दिशा और संसाधन मिले, जिससे उनकी तैयारी को नई गति मिली।
हरदोई की प्रगति वर्मा, जो असिस्टेंट कमिश्नर (कमर्शियल टैक्स) बनी हैं, ने चौथे प्रयास में सफलता हासिल की। उनके पिता के निधन के बाद उनकी मां ने सफाई कर्मी के रूप में काम करके उन्हें पढ़ाया। प्रगति ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां के संघर्ष और अभ्युदय योजना को दिया।
सोनभद्र की खुशबू रानी ने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल कर अपने किसान परिवार का नाम रोशन किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों ने ही उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
इन सभी बेटियों की सफलता यह साबित करती है कि यदि सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर मिलें तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार की अभ्युदय योजना न केवल शिक्षा का माध्यम बन रही है, बल्कि यह युवाओं, खासकर बेटियों के सपनों को साकार करने का मजबूत प्लेटफॉर्म भी बन चुकी है।
Author: Chautha Prahari
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