मौंडी थर्सडे से ईस्टर त्रिदिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत, गुड फ्राइडे पर होगा विशेष प्रार्थना समारोह
लखनऊ, 29 मार्च। कैथोलिक धर्मप्रांत ने ईसाई समुदाय के सबसे महत्वपूर्ण पर्व ईस्टर को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। धर्मप्रांत की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस वर्ष 5 अप्रैल 2026 को ईस्टर का पर्व पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा।

ईस्टर से पहले मनाया जाने वाला पवित्र सप्ताह (होली वीक) 29 मार्च को पाम संडे के साथ शुरू हो चुका है। इस दिन ईसाई समुदाय के लोगों ने प्रभु यीशु मसीह के यरूशलेम में अंतिम प्रवेश की स्मृति में ताड़ और जैतून की शाखाओं के साथ जुलूस निकाला और विशेष प्रार्थनाएं कीं।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ईस्टर से पहले के अंतिम तीन दिन, जिन्हें ईस्टर त्रिदिवसीय अनुष्ठान (Easter Triduum) कहा जाता है, 2 अप्रैल से शुरू होंगे। इस दिन मौंडी थर्सडे के अवसर पर शाम को पवित्र यूखरिस्ट (मिस्सा) का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान लखनऊ के कैथोलिक बिशप परम आदरणीय जेराल्ड जॉन मैथायस, प्रभु यीशु के प्रेम और विनम्रता के प्रतीक के रूप में 12 श्रद्धालुओं के पैर धोने की परंपरा का निर्वहन करेंगे।
धर्मप्रांत ने बताया कि कैथोलिक चर्च इस दिन को पवित्र यूखरिस्ट और पुरोहिताई की स्थापना के रूप में भी विशेष महत्व देता है।
इसके बाद 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे मनाया जाएगा, जो प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर चढ़ाए जाने और उनके बलिदान की स्मृति में मनाया जाता है। इस अवसर पर शाम 4 बजे शहर के गिरजाघरों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाएंगी। इन सभाओं में ‘क्रूस का मार्ग’ और ‘प्रभु के दुखभोग’ से संबंधित धार्मिक अनुष्ठान होंगे।
4 अप्रैल को पवित्र शनिवार के रूप में मनाया जाएगा, जो मौन, प्रार्थना और प्रतीक्षा का दिन होता है। इस दिन सुबह श्रद्धालु शांत प्रार्थना में समय व्यतीत करेंगे। वहीं, रात 10:30 बजे लखनऊ के सभी गिरजाघरों में ईस्टर की पूर्व संध्या (विजिल) पर विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाएंगी।
शहर के प्रमुख गिरजाघर सेंट जोसेफ कैथेड्रल, हजरतगंज में भी इस अवसर पर भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
5 अप्रैल को ईस्टर रविवार की सुबह 8 बजे से शहर के विभिन्न चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाएंगी। इस दिन प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान का उत्सव मनाया जाता है, जिसे ईसाई धर्म में आशा, प्रेम, शांति और नए जीवन का प्रतीक माना जाता है।
लखनऊ के कैथोलिक बिशप परम आदरणीय जेराल्ड जॉन मैथायस ने इस अवसर पर सभी नागरिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ईस्टर का संदेश मानवता के लिए आशा, प्रेम और शांति का है, जिसे समाज में अपनाने की आवश्यकता है।
कैथोलिक धर्मप्रांत के कुलपति एवं प्रवक्ता रेव. डॉ. डोनाल्ड एच. आर. डी सूजा ने बताया कि सभी कार्यक्रम निर्धारित समय पर शहर के विभिन्न गिरजाघरों में आयोजित किए जाएंगे और श्रद्धालुओं से इसमें अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।
Author: Chautha Prahari
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