लखनऊ, 5 अप्रैल।राजधानी लखनऊ में टोल प्लाजा से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जिसने परिवहन व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि यह मामला केवल तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि संगठित स्तर पर की जा रही अनियमितताओं से जुड़ा हो सकता है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक बीते एक माह में करीब 1600 ओवरलोड ट्रक संबंधित टोल प्लाजा से गुजरे। जब इन वाहनों के नंबरों की जांच की गई, तो करीब 900 नंबर संदिग्ध पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि इन नंबरों से संबंधित कोई स्पष्ट चेसिस रिकॉर्ड या परिवहन विभाग के पोर्टल पर वैध डेटा उपलब्ध नहीं है।
अधिकारियों की माने तो मामले की जांच के दौरान यह आशंका जताई जा रही है कि कुछ एंट्री गलत तरीके से दर्ज की गई हों या सिस्टम का दुरुपयोग किया गया हो। हालांकि, अभी तक किसी भी स्तर पर आधिकारिक रूप से मिलीभगत की पुष्टि नहीं की गई है।
सूत्रों की मानें तो टोल प्लाजा पर वाहनों की एंट्री प्रक्रिया में अनियमितताओं की संभावना जताई जा रही है। यह भी जांच का विषय है कि कहीं फर्जी या गलत नंबर दर्ज कर ओवरलोड वाहनों को बिना रोक-टोक गुजरने की अनुमति तो नहीं दी गई।
मामले का खुलासा तब हुआ जब सरोजनीनगर क्षेत्र में एक संदिग्ध ट्रक को पकड़ा गया। प्राथमिक जांच में वाहन के दस्तावेजों और नंबर प्लेट में गड़बड़ी पाए जाने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। इसके बाद पूरे मामले की गहन जांच शुरू की गई।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे प्रकरण में किन-किन स्तरों पर लापरवाही या संभावित अनियमितताएं हुई हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह मामला किसी बड़े अवैध परिवहन या खनन नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।
परिवहन विभाग के जानकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल सरकारी राजस्व को प्रभावित करती हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती हैं। ओवरलोड वाहनों के कारण सड़क हादसों की आशंका बढ़ जाती है, जिससे आम लोगों की जान-माल को जोखिम होता है।
फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच में जुटे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।
Author: Chautha Prahari
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