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योगी आदित्यनाथ सरकार का बड़ा फैसला: शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के मानदेय में ऐतिहासिक बढ़ोतरी, कैबिनेट की मंजूरी

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शिक्षामित्रों तथा अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाए जाने की जानकारी देते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री

लखनऊ, 07 अप्रैल। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के लाखों शिक्षाकर्मियों को बड़ी राहत देते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी गई। इस फैसले से लंबे समय से वेतन वृद्धि की मांग कर रहे शिक्षाकर्मियों को बड़ी राहत मिली है। योगी सरकार का यह फैसला शिक्षामित्र अंशकालिक अनुदेशकों के लिए सजीवनी साबित होगा। इस महंगाई के दौर में शिक्षामित्रो एवं अनुदेशकों का मानदेय बढ़ने से काफी खुशी का भी एहसास होगा।

कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, वर्ष 2017 से ₹10,000 प्रतिमाह मानदेय प्राप्त कर रहे शिक्षामित्रों का मानदेय अब बढ़ाकर ₹18,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। वहीं अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय ₹9,000 से बढ़ाकर ₹17,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। यह बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और मई माह में मिलने वाले भुगतान में इसकी बढ़ी हुई राशि शामिल होगी।

शिक्षामित्रों तथा अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाए जाने की जानकारी देते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री
योगी सरकार के इस फैसले से प्रदेश के लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों को सीधा लाभ मिलेगा। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में 1,42,929 शिक्षामित्र प्रदेश में कार्यरत हैं। इनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों का मानदेय केंद्र सरकार के समग्र शिक्षा अभियान के तहत 60:40 के अनुपात में आता है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को इस बढ़ोतरी के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। यदि केंद्र से अनुमोदन नहीं मिलता है, तो राज्य सरकार ही इस अतिरिक्त व्यय को वहन करेगी। इस वृद्धि के कारण इन शिक्षामित्रों पर लगभग ₹1138.12 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा, जिसे राज्य सरकार उठाने के लिए तैयार है।
वहीं शेष 13,597 शिक्षामित्र ऐसे हैं, जिनका मानदेय पूरी तरह राज्य सरकार द्वारा दिया जाता है। इनके लिए भी लगभग ₹119.65 करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार आएगा।
अंशकालिक अनुदेशकों की बात करें तो प्रदेश के 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कुल 24,717 अनुदेशक कार्यरत हैं। इनके मानदेय में भी बड़ी वृद्धि की गई है, जिससे राज्य सरकार पर ₹217.50 करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार पड़ेगा।
कुल मिलाकर इस फैसले से प्रदेश सरकार पर ₹1475.27 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। बावजूद इसके, सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और शिक्षाकर्मियों का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से यह बड़ा निर्णय लिया है।
यह फैसला उत्तर प्रदेश विधानसभा के वर्ष 2026 के प्रथम सत्र में मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप लिया गया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल शिक्षकों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलेगा।
गौरतलब है कि शिक्षामित्र और अंशकालिक अनुदेशक लंबे समय से अपने मानदेय में वृद्धि की मांग कर रहे थे। ऐसे में यह निर्णय उनके लिए बड़ी राहत के रूप में सामने आया है और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए भी एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

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