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लिपिकों से स्कूल वाहनों का निरीक्षण कराने पर आपत्ति, शासन ने परिवहन आयुक्त को दिए जांच के निर्देश

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कर्मचारी संघ की शिकायत पर हरकत में आया शासन, नियमों के तहत कार्रवाई के निर्देश

 (विनय प्रकाश सिंह)
लखनऊ,10 अप्रैल।उत्तर प्रदेश के संभागीय और उपसंभागीय परिवहन कार्यालयों में कार्यरत लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों से विद्यालयी वाहनों के तकनीकी और भौतिक निरीक्षण कराए जाने के मामले पर विवाद खड़ा हो गया है। इस पर आपत्ति जताते हुए कर्मचारी संगठन ने शासन से हस्तक्षेप की मांग की थी, जिसके बाद अब शासन स्तर पर कार्रवाई शुरू हो गई है।

परिवहन अनुभाग 4 के अनुसचिव धारा परिवहन आयुक्त को लिखा गया पत्र
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश शासन के परिवहन अनुभाग-4 से जारी पत्र में अनुसचिव अरविन्द कुमार ने परिवहन आयुक्त को निर्देशित किया है कि इस पूरे प्रकरण में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि उत्तर प्रदेश संभागीय परिवहन कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव/अध्यक्ष द्वारा 01 अप्रैल 2026 को भेजे गए पत्र में यह आपत्ति दर्ज कराई गई थी कि लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों की ड्यूटी विद्यालयी वाहनों के तकनीकी एवं भौतिक निरीक्षण में लगाई जा रही है। साथ ही, उनके लिए निरीक्षणकर्ता अधिकारी के रूप में पोर्टल पर लॉगिन आईडी भी बनाई जा रही है, जो नियमों के विपरीत बताया गया है।
क्या है पूरा मामला?
कर्मचारी संघ का कहना है कि लिपिकीय कार्य करने वाले कर्मचारियों से तकनीकी निरीक्षण कराना उनके कार्यक्षेत्र से बाहर है। ऐसे में यह व्यवस्था न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे जिम्मेदारी और जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
शासन का क्या कहना है?
अनुसचिव अरविन्द कुमार द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए परिवहन आयुक्त को निर्देश दिया गया है कि नियमों के तहत उचित निर्णय लेते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
क्या हो सकता है असर?
इस आदेश के बाद परिवहन विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की ड्यूटी व्यवस्था में बदलाव संभव माना जा रहा है। यदि आपत्ति सही पाई जाती है, तो लिपिकों को निरीक्षण कार्य से हटाया जा सकता है और यह जिम्मेदारी तकनीकी अधिकारियों को सौंपी जा सकती है।

सरकारी कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र को लेकर उठा यह मुद्दा अब तेजी से चर्चा में है और लोग इसे प्रशासनिक गड़बड़ी से जोड़कर देख रहे हैं।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

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