लखनऊ, 15 अप्रैल। राजधानी लखनऊ स्थित आलमबाग बस टर्मिनल पर भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती बड़े उत्साह और गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर बस टर्मिनल परिसर को सजाया गया और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी रही।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय प्रबंधक अमरनाथ सहाय तथा विशिष्ट अतिथि एम.के. वर्मा उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने डॉ. अंबेडकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके विचारों को याद किया।
अपने संबोधन में अमरनाथ सहाय ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने अपने विचारों और कार्यों से भारतीय समाज को नई दिशा दी। उन्होंने सामाजिक समानता, शिक्षा और अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया। वहीं एम.के. वर्मा ने भी उनके जीवन और योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके सिद्धांत आज भी समाज को प्रेरित करते हैं।
कर्मचारी नेता रूपेश कुमार ने माल्यार्पण करते हुए कहा कि डॉ. अंबेडकर ने न केवल भारतीय संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि समाज के वंचित और शोषित वर्गों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार दिलाने में भी अहम योगदान दिया। उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल 1891 को जन्मे बाबासाहेब का जीवन संघर्ष, शिक्षा और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।
कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा गया कि “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” का संदेश आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने उनके बताए मार्ग पर चलने और समाज में समानता व समरसता स्थापित करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक राजेश कुमार सिंह, बनारसी राम, जितेंद्र कुमार, एस.पी. सोनकर, वसीम सिद्दीकी, वेद रत्न वर्मा, फूल चंद, अमित कुमार, गुरमीत सिंह, विजय कुमार, शैलेश कुमार, आशीष कुमार मिश्रा, चन्द्र कुमार, शीतल प्रसाद सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया और भविष्य में भी इस तरह के सामाजिक एवं प्रेरणादायक आयोजनों को जारी रखने की बात कही गई।
Author: Chautha Prahari
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