लखनऊ, 21 जून(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा है कि वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद प्रदेश में दलितों के विकास का नया दौर शुरू हुआ। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में दलित समाज का सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तीकरण तेजी से हुआ है।

डॉ. निर्मल रविवार को लखनऊ के उद्यान भवन सभागार में आयोजित एक चिंतन गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय स्वच्छकार समाज महासंघ और सामाजिक सरोकार फाउंडेशन की ओर से किया गया था।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि योगी सरकार दलित हितों से जुड़े कई मुद्दों पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सफाईकर्मियों की आय बढ़ाने और ठेकेदारी व्यवस्था से जुड़े विषयों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। आने वाले समय में इस दिशा में कुछ बड़े फैसले भी लिए जा सकते हैं।
डॉ. निर्मल ने कहा कि सरकार ने डॉ. भीमराव आंबेडकर और महर्षि वाल्मीकि से जुड़े स्मारकों और प्रतिमाओं के संरक्षण के लिए भी कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी कार्यालयों में डॉ. आंबेडकर के चित्र लगाए गए हैं। साथ ही उनकी और महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमाओं के आसपास बाउंड्रीवाल, छतरी और सौंदर्यीकरण के लिए बजट की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि स्टैंडअप इंडिया सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से दलित युवाओं और उद्यमियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
डॉ. निर्मल ने हाथ से मैला उठाने की प्रथा को समाप्त करने के लिए चलाए गए शौचालय निर्माण अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सीवर सफाई के दौरान स्वच्छताकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी सरकार ने कई कदम उठाए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि विधान परिषद और राज्यसभा में आरक्षण का प्रावधान नहीं होने के बावजूद केंद्र और प्रदेश सरकार ने दलित समाज के लोगों को इन सदनों में प्रतिनिधित्व देने का काम किया है। उनके अनुसार, यही कारण है कि दलित समाज के बीच सरकार की योजनाओं को सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार संतोष वाल्मीकि ने की। गोष्ठी में अमेरिका से आए वैज्ञानिक बच्चू लाल वाल्मीकि सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
भविष्य पर असर-विशेषज्ञों का मानना है कि दलित समाज से जुड़े मुद्दों पर सरकार और सामाजिक संगठनों के बीच संवाद बढ़ने से नई नीतियों और योजनाओं को दिशा मिल सकती है। सफाईकर्मियों की कार्य परिस्थितियों, आय और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर यदि नए फैसले होते हैं तो इसका सीधा असर बड़ी संख्या में परिवारों पर पड़ सकता है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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