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लखनऊ:आठवें वेतन आयोग की विचार परिधि में पुराने पेंशनरों को शामिल करने की होने लगी मांग  हजारों पेंशनर्स ने प्रदेश भर के जिलों में निकाला कैंडल मार्च राष्ट्रव्यापी धरना प्रदर्शन सभाएं 15 दिसंबर को करने की हो रही तैयारी

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लखनऊ, चौथा प्रहरी 29 नवंबर। केन्द्रीय 8वें वेतन आयोग के विचारणीय विषय में जनवरी 2026 के पूर्व के रिटायर्ड पेंशनर्स के पेंशन के पुनरीक्षण एवं महंगाई राहत तथा अन्य लाभ को शामिल किये जाने की मांग को लेकर आज उत्तर प्रदेश के समस्त जनपदों में पेंशनर्स ने आमसभा कर कैंडिल मार्च निकालकर स्थानीय प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपने का काम किया है और ज्ञापन की प्रतियां केन्द्रीय वित्तमंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा अन्य सम्बन्धितों को भेजा है। सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के आवाहन पर हुये इस कार्यक्रम में कर्मचारियों एवं शिक्षकों के सेवारत संगठन सहित दर्जनों विभागों से जुड़े पेंशनर्स ने बड़ी संख्या भागीदारी कर आंदोलन को धार दिया है।

राजधानी लखनऊ में यह कार्यक्रम स्थानीय बीएन सिंह प्रतियां स्थल पर आयोजित किया गया जहाँ आमसभा के पश्चात् गांधी प्रतिमा तक कैंडिल मार्च निकालकर सरकार को सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना की गई और पुलिस कमिश्नर के माध्यम से प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री एवं मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। प्रदेश भर के जनपदों से विभिन्न श्रोतों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर महामंत्री ओ.पी. त्रिपाठी ने दावा किया कि आज के कार्यक्रम में प्रदेश भर में लगभग 50,000 पेंशनर्स ने भाग लिया।आम सभा को सम्बोधित करते हुए पेंशनर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमरनाथ यादव ने कहा कि वित्त विधेयक 2025 के माध्यम से बदलाव कर सेवानिवृत्त तिथि के आधार पर पेंशनर्स में भेद करने का अधिकार अपने हाथ में लिया था, और उसका क्रियान्वयन 8वें केन्द्रीय वेतन आयोग के विचारणीय विषय से सरकार रिपोर्ट लागू होने की प्रस्तावित तिथि 1 जनवरी 2026 से पूर्व के सेवानिवृत्त पेंशनर्स को बाहर का रास्ता दिखाकर किया है। 7वें वेतन आयोग के जिस क्लाॅज में पुराने पेंशनर्स की पेंशन, पुनरीक्षण व अन्य लाभों पर सिफारिश का प्राविधान था, उस क्लाॅज को ही हटा दिया गया है। उच्चतम् न्यायालय ने अपनी पूर्ण पीठ के फैसला 17 दिसंबर 1982 को पेंशन को लम्बित वेतन बताया है। जबकि सरकार इसे गैर अंशदायी एवं गैर वित्तीय फण्डेड बता रही है।वरिष्ठ उपाध्यक्ष बीएल कुशवाहा ने कहा कि केन्द्र/राज्यों के पेंशनर्स की कुल संख्या लगभग 2 करोड़ है और इनके परिवारों को मिलाकर यह लगभग 10 करोड़ लोगों के रोटी और पेट से जुड़ा सवाल है अगर सरकार ने इनके हितरक्षण के प्रति सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो यह आंदोलन राष्ट्रव्यापी रूप लेने जा रहा है जिसकी कड़ी में आगामी 15 दिसम्बर को आॅल इण्डिया स्टेट गवर्नमेंट पेंशनर्स फेडरेशन के आवाहन पर देश भर के सभी राज्यों, जनपदों में विरोध प्रदर्शन प्रतिरोध सभायें की जायेंगी। सरकार तब भी नहीं चेती तो आंदोलन तेज करने को बाध्य होना पड़ेगा।सभा को एसपी सिंह, ओपी त्रिपाठी, कमलेश मिश्रा, नरेन्द्र कुमार वर्मा, डाॅ0 आरपी मिश्र, एस.के. मिश्रा, इं0 ओ0पी0 राय, इं0 आर0पी0 अवस्थी, रामभजन मौर्य, इं0 राकेश कुमार यादव, अंगद सिंह, श्याम सिंह राठौर, गंगाधर निरंकारी, एस0के0 अवस्थी, गंगाराम गौतम, रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय, आर0सी0 मिश्र, आर0डी0 राम कनौजिया, कमलेश पाठक, रामस्वरूप कश्यप, इं0 नीतेन्द्र श्रीवास्तव, आर0सी0 उपाध्याय, यू0एस0 उपाध्याय, एन0पी0 सिंह, जी0एसव0 कुशवाहा, दिनेश चन्द्र बाजपेयी, एस0के0 पाण्डेय, भगवान सिंह वर्मा, विष्णु पाल आदि ने सम्बोधित किया। अध्यक्षता जिला अध्यक्ष अंगद सिंह एवं संचालन जिलामंत्री आर.सी. उपाध्याय ने किया।  इस कार्यक्रम माध्यमिक शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ, लोक निर्माण विभाग, राज्य कर्मचारी महासंघ, खाद्य एवं रसद विभाग, सिंचाई, कारागर विभाग, जल संस्थान, के.जी.एम.यू. विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद, अर्थ एवं संख्या, योजना भवन, स्वास्थ्य, बाल विकास पुष्टाहार, ग्राम्य विकास एवं सम्बद्ध संगठनों आदि विभागों के सेवानिवृत्त कर्मचारी, शिक्षक पेंशनर्स ने बड़ी संख्या में भागीदारी किया है।

 

 

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

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