लखनऊ,चौथा प्रहरी 29 नवंबर। राजधानी लखनऊ के डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संस्थान बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण द्वारा आयोजित 31वाँ राष्ट्रीय अभिभावक सम्मेलन 2025 का भव्य शुभारम्भ कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप तथा मुख्यमंत्री सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी की उपस्थिति में शनिवार को दीप प्रज्वलित किया गया।
कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने कहा कि बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के समग्र कल्याण की जिम्मेदारी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को गार्जियनशिप संबंधी प्रक्रियाओं में सहयोग मिलना अत्यंत आवश्यक है ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके। उन्होंने परिवार संगठन द्वारा पिछले 30 वर्षों में किए गए सराहनीय कार्यों का उल्लेख करते हुए नीति-निर्माण में उनकी सक्रिय भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।प्रदेश के दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार बौद्धिक दिव्यांग बच्चों की शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास के लिए हर संभव कदम उठा रही है। प्रदेश सरकार की योजनाओं और नीतियाँ को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करते हुए, प्रत्येक पात्र दिव्यांगजन को लाभान्वित किया जा रहा है।मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि वे बौद्धिक दिव्यांगजन को अवसर प्रदान कर समाज की मुख्यधारा में सम्मिलित करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएँ।कार्यक्रम के दौरान अनेक महत्वपूर्ण गतिविधियाँ सम्पन्न हुईं, जिनमें पैरिवार की वार्षिक रिपोर्ट 2024–25 का विमोचन और सौम्या उपाध्याय ‘तताई’ द्वारा लिखित पुस्तक “Who knew the forgotten you” का लोकार्पण किया गया। साथ ही पैरिवार राष्ट्रीय पुरस्कार 2025 प्रदान किए गए, जिनमें रोशनी सोसायटी हल्द्वानी, परिवार पलक्कड़ और मेसेनी पोंग पोंगें को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही स्पेशल ओलंपिक्स वर्ल्ड गेम्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले आठ बौद्धिक दिव्यांग पैराअथलीटों को सम्मानित किया गया। शाम के सत्र में बौद्धिक दिव्यांगजन प्रतिभागियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सभी को प्रभावित किया।दो दिवसीय सम्मेलन में कुल 11 तकनीकी सत्र, 4 पैनल चर्चाएँ और एक सांस्कृतिक संध्या आयोजित की जाएँगी। इस राष्ट्रीय अभिभावक सम्मेलन का उद्देश्य अभिभावकों, विशेषज्ञों, स्वयं-प्रतिनिधियों, विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों और नीति-निर्माताओं को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है, जिससे बौद्धिक दिव्यांगजन के नेतृत्व निर्माण, समावेशन, अधिकारों, भविष्य की सुरक्षा और नीति-निर्माण पर राष्ट्रीय स्तर पर संवाद स्थापित हो सके। सम्मेलन का समापन 30 नवम्बर को खुला मंच चर्चा के साथ होगा, जिसमें आगामी वर्ष के लिए सामूहिक कार्ययोजना और सुझाव प्रस्तुत किए जाएंगे।कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. सुदीप गोयल ने किया तथा आभार प्रकट करते हुए समापन टिप्पणी यू.पी. पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. सुभोध शंकर ने दी।सम्मेलन का आयोजन पैरिवार – नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ पेरेंट्स ऑर्गेनाइजेशंस के सहयोग से तथा डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय और यू.पी. पेरेंट्स एसोसिएशन के संयुक्त संयोजन में किया गया। सम्मेलन का केंद्रीय विषय “समावेशी एवं सतत भविष्य के लिए नेतृत्व का संवर्द्धन” रखा गया, जिसमें देश के 25 राज्यों से 350 से अधिक अभिभावकों, विशेषज्ञों, संस्थानों, एनजीओ और स्वयं-प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।इस मौके पर मेजर बी. वी. रामकुमार, निदेशक NIEPID सिकंदराबाद, राज्य दिव्यांगजन आयुक्त प्रो. हिमांशु शेखर झा, डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलसचिव रोहित सिंह मौजूद थे।
Author: Chautha Prahari
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