चालकों की सुरक्षा और बेहतर जीवन के लिए अप्रैल में होगा बड़ा सम्मेलन

लखनऊ,15 फरवरी। ड्राइवर की सुरक्षा और बेहतर जीवन स्थितियों के लिए केंद्रीय कानून बनाने और ड्राइवर सुरक्षा आयोग का गठन करने की मांग पर रविवार को राजधानी लखनऊ के छितवापुर में पूरे प्रदेश के विभिन्न ड्राइवर संगठनों की सामूहिक बैठक आयोजित की गई। जिसमें अप्रैल माह में लखनऊ में एक बड़ा सम्मेलन करने का फैसला लिया गया।
संरक्षक, ड्राइवर संघ व पूर्व पार्षद अमित सोनकर के मुताबिक बैठक में दुर्घटना मृत्यु की स्थिति में ड्राइवरों के परिवार जनों को 20 लाख रुपए मुआवजा देने, ड्राइवर के बच्चों को मुफ्त शिक्षा और मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा देने, वृद्धावस्था पेंशन का प्रबंध करने, उनके लिए आवास देने आदि मांगों को भी उठाने का फैसला लिया गया। बैठक में कहा गया कि भारत का संविधान सभी नागरिकों के सम्मानजनक जीवन को सुनिश्चित करता है। लेकिन ड्राइवर समूह के लिए की सामाजिक और जीवन सुरक्षा के लिए आज तक कोई कानून नहीं बनाया गया। यहां तक कि उनके लिए सुरक्षा आयोग का भी गठन नही किया गया 2008 में असंगठित मजदूरों के लिए बने सामाजिक सुरक्षा कानून, जिसके तहत चालक समूह भी आता है, उसे भी प्रदेश में लागू नहीं किया गया। जिसके कारण ड्राइवर की सुरक्षा की कोई व्यवस्था आज नहीं है। बैठक में लखनऊ में बहुत सारे स्थान पर ई-रिक्शा को बंद करने की प्रक्रिया पर भी गहरा रोष प्रकट किया गया। बैठक में फैसला लिया गया कि ड्राइवर की समस्याओं पर पूरे प्रदेश में संवाद प्रक्रिया चलाई जाएगी और सभी राजनीतिक, सामाजिक संगठनों से संपर्क कर उनसे मदद ली जाएगी।

बैठक की अध्यक्षता ई रिक्शा ई ऑटो चालक संयुक्त मोर्चा मुन्ना लाल यादव एवं ड्राइवर कल्याण महासंघ के अध्यक्ष राजेश मिश्रा ने की और संचालन पूर्व पार्षद अमित सोनकर ने किया। बैठक को आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के प्रदेश महासचिव दिनकर कपूर, राष्ट्रीय पासी एकता मंच के शिव कुमार पासी, हैदर कैनाल कल्याण समिति के संरक्षक गोविंद गौतम, दलित बुध्दिजीवी राम कुमार भारती, लोजपा महासचिव के पी भारती, मोनू कुमार, राजेश यादव, सुरेश यादव, रंजीत यादव, दुर्गेश कुमार, बलराम गिरी, वंशीधर यादव, आर जी शर्मा, राम विलास लांगुरिया आदि लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।
Author: Chautha Prahari
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