मिर्जापुर। जनपद के प्रसिद्ध विंध्याचल मंदिर में नवरात्रि से पहले ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। देश के अलग-अलग हिस्सों से माता विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए पहुंच रहे भक्तों के कारण मंदिर परिसर में सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

दर्शन के लिए बनाए गए बैरिकेडिंग मार्ग में श्रद्धालुओं को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कई भक्तों का कहना है कि उन्हें 2 से 3 घंटे तक लाइन में लगना पड़ रहा है, जिसके बाद ही उन्हें माता के दर्शन का अवसर मिल पा रहा है। भीड़ और अव्यवस्था के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मंदिर के भीतर प्रवेश के दौरान एक व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, जिसे “पुरोहित दर्शन मार्ग” कहा जाता है। मंदिर परिसर में इस मार्ग के पास स्पष्ट रूप से इसका उल्लेख किया गया है। आरोप है कि कुछ पुरोहित इस व्यवस्था का लाभ उठाते हुए अपने साथ आने वाले लोगों को सीधे अंदर ले जाकर जल्दी दर्शन करा देते हैं।

दूसरी ओर आम श्रद्धालु लंबी लाइन में लगे रहते हैं और घंटों इंतजार करते हैं। इससे भक्तों में असंतोष देखने को मिल रहा है। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि जब सभी लोग माता के दर्शन के लिए आते हैं, तो व्यवस्था समान होनी चाहिए। इस तरह की व्यवस्था से आम लोगों के साथ भेदभाव जैसा महसूस होता है।
नवरात्रि जैसे बड़े पर्व से पहले ही यह स्थिति प्रशासन और मंदिर प्रबंधन के लिए चिंता का विषय बन गई है। अनुमान लगाया जा रहा है कि जैसे-जैसे नवरात्रि नजदीक आएगी, श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ेगी, जिससे व्यवस्थाओं पर और दबाव पड़ेगा।
इसी बीच, क्षेत्र में विकास कार्य भी तेजी से चल रहे हैं। विंध्याचल रेलवे स्टेशन के सुंदरीकरण का कार्य तेज गति से किया जा रहा है, जिससे आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। रेलवे स्टेशन के विकास से क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व अनुप्रिया पटेल कर रही हैं। क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों के साथ-साथ धार्मिक स्थलों के सुधार पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मंदिर के प्रवेश से पहले अपना दल (एस) का कार्यालय भी मौजूद है, जो क्षेत्रीय राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र माना जाता है।
कुल मिलाकर, विंध्याचल मंदिर में बढ़ती भीड़ और पुरोहित दर्शन व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल अब एक बड़े मुद्दे के रूप में सामने आ रहे हैं। ऐसे में प्रशासन और मंदिर प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे सभी श्रद्धालुओं के लिए पारदर्शी और समान व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि किसी को भी अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और सभी भक्त सहज रूप से माता का दर्शन कर सकें।
Author: Chautha Prahari
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