लखनऊ, 21 मार्च। अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राष्ट्रीय वानिकी संवाद के उद्घाटन समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने प्रकृति को “मां” मानकर उसके संरक्षण का संदेश दिया और कहा कि जनभागीदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकते।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में वनों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। उन्होंने भारतीय वैदिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः” की भावना हमें प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों की याद दिलाती है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया और वन विभाग की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय वन दिवस की थीम ‘फॉरेस्ट एंड इकोनॉमिक्स’ रखी गई है, जो पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के संतुलन पर केंद्रित है।
सीएम योगी ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में वनाच्छादन बढ़ाने में उल्लेखनीय सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में जहां 5.5 करोड़ पौधे लगाए गए थे, वहीं पिछले वर्ष 37 करोड़ पौधे एक ही दिन में लगाए गए। अब तक कुल 242 करोड़ पौधरोपण कर इसे जन आंदोलन का स्वरूप दिया गया है।
रामसर साइट्स के विस्तार पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रदेश में केवल एक रामसर साइट थी, जो अब बढ़कर 11 हो चुकी है। सरकार का लक्ष्य इसे 100 तक पहुंचाने का है। उन्होंने बताया कि रामसर साइट्स जैव विविधता, पर्यटन और जल संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इससे भूमि पर अवैध कब्जों को रोकने में भी मदद मिलती है।
वन संरक्षण के साथ-साथ इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दुधवा नेशनल पार्क का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां कनेक्टिविटी में सुधार किया गया है और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि बाघों सहित वन्य जीवों का संरक्षण हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जहां कार्बन फाइनेंस प्रोजेक्ट के तहत किसानों को कार्बन क्रेडिट के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके साथ ही प्रदेश में 2,467 वन आधारित ग्रीन इकोनॉमी मॉडल उद्योग स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि “वन है तो बाघ है, बाघ है तो जैव विविधता है और जैव विविधता है तो मानव सभ्यता का अस्तित्व है।” इसी क्रम में उन्होंने बताया कि नमामि गंगे परियोजना के बाद देश में डॉल्फिन की संख्या बढ़कर 6,327 हो गई है, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश में 2,397 डॉल्फिन हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में भी राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पीएम सूर्य घर योजना के तहत 4 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं, जिससे 1,400 मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा अगले पांच वर्षों में 22,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि अयोध्या को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है और 17 अन्य नगर निगमों को भी इस दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी और ग्रीन हाइड्रोजन नीति के माध्यम से प्रदेश को कार्बन न्यूट्रल बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कॉफी टेबल बुक को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया और कहा कि इसे एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन तथा विश्वविद्यालयों तक पहुंचाया जाए ताकि लोग इससे पर्यावरण से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि 100 वर्ष पुराने पेड़ों को ‘विरासत वृक्ष’ घोषित कर उनके संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस अवसर पर वन एवं पर्यावरण विभाग के मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, राज्य मंत्री केपी मलिक, प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमुरी, बी. प्रभाकर तथा ललित वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
Author: Chautha Prahari
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