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स्वर्णरेखा नदी में मिला 500 पाउंड का अमेरिकी बम, बहरागोड़ा में हड़कंप

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बहरागोड़ा/पूर्वी सिंहभूम, झारखंड, 22 मार्च।
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा थाना क्षेत्र में स्थित स्वर्णरेखा नदी से 500 पाउंड का संदिग्ध अमेरिकी बम मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। यह बम बालू खुदाई के दौरान ग्रामीणों को मिला, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, स्थानीय ग्रामीण नदी किनारे बालू निकाल रहे थे, तभी उन्हें भारी धातु का एक संदिग्ध वस्तु दिखाई दी। पास जाकर देखने पर यह किसी बम जैसा प्रतीत हुआ। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन और पुलिस को दी, लेकिन आरोप है कि सूचना मिलने के बावजूद प्रशासन ने करीब दो दिनों तक इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया।

स्वर्णरेखा नदी किनारे मिला बम जांच करती बम निरोधक टीम
घटना के दो दिन बाद जब मामला उच्च स्तर तक पहुंचा, तब रांची से बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचा। जांच के बाद विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि यह एक अत्यंत शक्तिशाली और खतरनाक बम है, जिसका वजन करीब 500 पाउंड है। बम निरोधक टीम के अनुसार, यह विस्फोटक सामग्री काफी पुरानी है लेकिन अभी भी सक्रिय हो सकती है, जिससे बड़ा खतरा बना हुआ है।
प्राथमिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि यह बम 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय का हो सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि के लिए विस्तृत जांच जारी है। विशेषज्ञ यह भी देख रहे हैं कि यह बम यहां कैसे पहुंचा और इतने वर्षों तक नदी में दबा कैसे रहा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे इलाके को सील कर दिया है। पुलिस और सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति बम के पास न जा सके। ग्रामीणों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे क्षेत्र से दूर रहें और किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें।
बम को निष्क्रिय करने के लिए सेना की मदद लेने की तैयारी की जा रही है। बम निरोधक दस्ते ने बताया कि इतने बड़े और पुराने बम को डिफ्यूज करना बेहद जटिल और जोखिम भरा काम है, इसलिए इसमें सैन्य विशेषज्ञों की सहायता आवश्यक हो सकती है।
स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती तो खतरे को जल्दी नियंत्रित किया जा सकता था। वहीं अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है और सुरक्षा के सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
इस घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि पुराने युद्धकालीन विस्फोटक आज भी आम लोगों के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकते हैं। फिलहाल सभी की नजर इस पर है कि बम को सुरक्षित तरीके से कब और कैसे निष्क्रिय किया जाएगा।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

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