अयोध्या। रामनगरी की पावन धरती पर आयोजित राम कथा महोत्सव का द्वितीय दिवस भक्ति, आस्था और श्रद्धा के अद्भुत संगम का साक्षी बना। ग्रामसभा सरायरासी में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे और राम कथा का रसपान कर भाव-विभोर हो गए।
कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था, जो दिनभर चलता रहा। पूरे परिसर में “जय श्री राम” के उद्घोष से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ी, श्रद्धालु भक्ति में डूबते चले गए और पूरा क्षेत्र राममय हो उठा।

प्रख्यात संत स्वामी गोविन्द देव गिरी महाराज ने अपने श्रीमुख से मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की दिव्य कथा का वर्णन किया। उन्होंने अपने प्रवचन में भगवान राम के आदर्शों, त्याग, मर्यादा और धर्म के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को विस्तार से समझाया। उनके ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचन ने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया।
स्वामी जी ने कहा कि भगवान राम केवल एक देवता नहीं, बल्कि जीवन जीने की आदर्श पद्धति हैं। उन्होंने बताया कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में राम के आदर्शों को अपनाता है, तो उसका जीवन स्वतः ही सुख, शांति और समृद्धि से भर जाता है। कथा के दौरान श्रद्धालु कई बार भावुक हो उठे और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
इस अवसर पर कई गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की भव्यता को और बढ़ा दिया। इनमें भूपेन्द्र चौधरी (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा), चंपत राय (महासचिव, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र), सतीश गौतम (सांसद, अलीगढ़), अंगद सिंह (एमएलसी, बाराबंकी), रमाशंकर सिंह (पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, अंबेडकरनगर) और विजय विक्रम सिंह (सदस्य, पूर्वांचल विकास बोर्ड) सहित अनेक प्रमुख जनप्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति शामिल रहे।
इसके अलावा विभिन्न आश्रमों और मंदिरों से आए संत-महंत और धर्माचार्यों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और भी दिव्य बना दिया। सभी अतिथियों का आयोजन समिति द्वारा पारंपरिक रूप से स्वागत किया गया और उन्हें सम्मानित किया गया।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि यह राम कथा महोत्सव केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से जन-जन के हृदय में राम नाम की ज्योति प्रज्वलित करने का कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि “जहां राम का नाम लिया जाता है, वहां सुख और शांति स्वतः ही विराजमान हो जाती है।” इसी भावना के साथ यह आयोजन निरंतर आगे बढ़ रहा है और लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा है।
श्रद्धालुओं का उत्साह और भक्ति इस बात का प्रमाण है कि आज भी भगवान राम के प्रति लोगों की आस्था अटूट है। आयोजन स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
राम कथा महोत्सव के आगामी दिनों में भी इसी प्रकार भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें और अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
Author: Chautha Prahari
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