लखनऊ, 24 मार्च। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लोकभवन में आयोजित एक भव्य समारोह में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और अटूट संकल्प से हासिल होती है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “हर मेडल के पीछे एक संघर्ष की कहानी होती है। जितना पसीना बहेगा, जीत उतना ही निकट आएगी।” उन्होंने खिलाड़ियों को जीवन में निरंतर प्रयास करते रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि खेल हमें गिरना, संभलना और अंततः जीतना सिखाता है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने लक्ष्मण पुरस्कार, रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार और नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इन पुरस्कारों की राशि को बढ़ाया जाए। वर्तमान में 3.11 लाख रुपये की राशि को बढ़ाकर अगले वर्ष से 10-10 लाख रुपये करने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश उन्होंने खेल विभाग को दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वीरवर लक्ष्मण समर्पण और अनुशासन के प्रतीक हैं, जबकि रानी लक्ष्मीबाई नारी शक्ति, स्वाभिमान और साहस का प्रतीक हैं। इन पुरस्कारों के माध्यम से खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलती है और वे देश-प्रदेश का नाम रोशन करते हैं।
नारी शक्ति पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जो समाज महिलाओं का सम्मान करता है, वही दीर्घकाल तक प्रगति करता है। उन्होंने चैत्र और शारदीय नवरात्रि का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पर्व मातृशक्ति के प्रति भारतीय संस्कृति की आस्था और श्रद्धा के प्रतीक हैं।
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश को युवा शक्ति का केंद्र बताते हुए कहा कि 25 करोड़ की आबादी वाले इस राज्य में 56 प्रतिशत युवा हैं, जो प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने बताया कि बीते 9 वर्षों में सरकार ने खिलाड़ियों को लगभग 200 करोड़ रुपये के पुरस्कार और प्रोत्साहन के रूप में दिए हैं।
उन्होंने पारंपरिक खेलों जैसे कबड्डी, कुश्ती और खो-खो को बढ़ावा देने की बात कही और बताया कि सरकार ग्रामीण स्तर पर खेल संस्कृति को विकसित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद देश में खेलों को नई पहचान मिली है। खेलो इंडिया और फिट इंडिया मूवमेंट जैसी योजनाओं ने युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित किया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में हर ब्लॉक स्तर पर खेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। गांवों में खेल मैदान और ओपन जिम बनाए जा रहे हैं, ताकि युवा खेलों से जुड़ सकें। उन्होंने यह भी कहा कि सांसद और विधायक अपनी निधि का उपयोग खेल सुविधाओं के विकास में कर सकते हैं।
एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि मेरठ में बन रहा मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय मई-जून में लोकार्पित किया जाएगा। यह विश्वविद्यालय खेल शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक बड़ा केंद्र बनेगा।
उन्होंने जापान की “काईजेन” (निरंतर सुधार) और “मोनो जुकरी” (उत्कृष्ट निर्माण कला) की अवधारणाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जीवन में निरंतर सुधार और गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था जब खेलों की उपेक्षा होती थी और खेल मैदानों पर अवैध कब्जे हो जाते थे, लेकिन अब सरकार ने खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं।
उन्होंने बताया कि ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को राज्य सरकार 6 करोड़ रुपये, रजत पदक पर 4 करोड़ और कांस्य पदक पर 2 करोड़ रुपये प्रदान करती है। इसके अलावा एशियन, कॉमनवेल्थ और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी खिलाड़ियों को आकर्षक पुरस्कार दिए जाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक 500 से अधिक खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियों में नियुक्ति दी जा चुकी है, जिससे खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित हो रहा है।
कार्यक्रम में खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
Author: Chautha Prahari
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