गोरखपुर, 27 मार्च। चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि पर मातृशक्ति के प्रति गहरी आस्था और सम्मान का भाव एक बार फिर देखने को मिला, जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में पारंपरिक विधि-विधान से कन्या पूजन अनुष्ठान संपन्न किया।
गोरखनाथ मंदिर के अन्न क्षेत्र में आयोजित इस विशेष अनुष्ठान में मुख्यमंत्री ने नौ दुर्गा स्वरूपा कन्याओं का पूजन कर उनके चरण पखारे। यह आयोजन गोरक्षपीठ की वर्षों पुरानी परंपरा के अनुरूप संपन्न हुआ, जिसमें कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी आराधना की जाती है।

अनुष्ठान की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने स्वयं कन्याओं के चरण धोकर उन्हें सम्मान दिया। इसके बाद उन्होंने कन्याओं के माथे पर रोली, चंदन और अक्षत से तिलक लगाया तथा दुर्वा से अभिषेक किया। पूजा के दौरान कन्याओं को माला पहनाई गई और चुनरी ओढ़ाकर उनका विधिवत पूजन किया गया।
मुख्यमंत्री ने न केवल पूजन किया, बल्कि अत्यंत श्रद्धाभाव से कन्याओं की आरती भी उतारी। इसके पश्चात उन्होंने मंदिर की रसोई में तैयार ताजा भोजन प्रसाद स्वयं अपने हाथों से कन्याओं को परोसा। इस दौरान उन्होंने विशेष ध्यान रखा कि किसी भी कन्या की थाली में भोजन की कोई कमी न हो। व्यवस्था में लगे लोगों को भी उन्होंने समय-समय पर निर्देश दिए।
पूजन के उपरांत सभी कन्याओं को दक्षिणा, उपहार और चुनरी भेंट की गई। मुख्यमंत्री ने कन्याओं से आशीर्वाद प्राप्त कर इस परंपरा का पूर्ण निर्वहन किया।

इस आयोजन में केवल कन्याएं ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में बटुक भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने बटुकों का भी पूजन कर उन्हें भोजन कराया और दक्षिणा व उपहार प्रदान किए।
कन्या पूजन से पहले प्रातःकालीन पूजा सत्र में मंदिर के शक्तिपीठ में मां सिद्धिदात्री की विधिवत आराधना की गई। यह पूजा नवरात्रि की नवमी तिथि के महत्व को दर्शाती है, जिसे देवी शक्ति की पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।
इस अवसर पर गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ सहित कई संत-महात्मा और मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोग भी उपस्थित रहे। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समय-समय पर मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को आगे बढ़ाते रहे हैं। कन्या पूजन जैसे धार्मिक आयोजनों के माध्यम से वे समाज में महिला सम्मान और परंपराओं के महत्व को भी रेखांकित करते हैं।
नवरात्रि के इस पावन अवसर पर आयोजित यह कन्या पूजन अनुष्ठान न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और सकारात्मक संदेश देने का माध्यम भी साबित हुआ।
Author: Chautha Prahari
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