नई दिल्ली। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण के मानकों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अखिल क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय सचिव स्वाती सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर EWS के नियमों में बड़े बदलाव की मांग उठाई है। उन्होंने देशभर में EWS के लिए एक समान नीति लागू करने, जमीन संबंधी मानकों को हटाने और प्रतियोगी परीक्षाओं में उम्र सीमा में छूट देने की मांग की है।

स्वाती सिंह का कहना है कि जब केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्ग के लिए 10% EWS आरक्षण पूरे देश में लागू किया गया है, तो इसके मानक राज्यों के अनुसार अलग-अलग क्यों हैं। उन्होंने इस असमानता को खत्म करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी समान नीति बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई राज्यों में EWS प्रमाण पत्र के लिए जमीन की सीमा तय की गई है, जिसके आधार पर किसी व्यक्ति को आर्थिक रूप से सक्षम या कमजोर माना जाता है। स्वाती सिंह के अनुसार, केवल जमीन होने के आधार पर किसी की आर्थिक स्थिति को मजबूत मान लेना व्यावहारिक नहीं है और यह सवर्ण समाज के गरीब वर्ग के साथ अन्याय है।
स्वाती सिंह ने यह भी कहा कि EWS व्यवस्था का सरलीकरण बेहद जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि इसमें ऐसे प्रावधान जोड़े जाएं, जिससे वास्तव में जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ मिल सके। उनका मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में कई तकनीकी शर्तें ऐसी हैं, जो पात्र लोगों को भी लाभ से वंचित कर देती हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं में उम्र सीमा को लेकर भी उन्होंने महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अन्य आरक्षित वर्गों—जैसे ओबीसी और एससी/एसटी—को उम्र में छूट मिलती है, उसी तरह EWS श्रेणी के अभ्यर्थियों को भी आयु सीमा में राहत दी जानी चाहिए। इससे आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सकेगा।
स्वाती सिंह ने देश में गरीबी के व्यापक स्तर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब सरकार खुद 85 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दे रही है, तो यह स्पष्ट है कि आर्थिक कमजोरी एक बड़ी समस्या है। ऐसे में केवल सामाजिक आधार पर आरक्षण देना और आर्थिक आधार को नजरअंदाज करना देश के विकास में बाधा बन सकता है।
इसके अलावा, उन्होंने EWS प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया में सामने आ रही शिकायतों और भ्रष्टाचार पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि कई जगहों पर प्रमाण पत्र बनवाने में अनियमितताएं और पारदर्शिता की कमी देखी जा रही है, जो इस व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन प्रदेशों में EWS के मानक अलग-अलग हैं, जो एक समान नीति की आवश्यकता को और अधिक स्पष्ट करता है।
अंत में स्वाती सिंह ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि EWS आरक्षण को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समान बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को इसका पूरा लाभ मिल सके और सामाजिक-आर्थिक संतुलन मजबूत हो सके।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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