लखनऊ, 06 अप्रैल। उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग में एक नए आदेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। संभागीय परिवहन कार्यालयों में कार्यरत लिपिक वर्ग के कर्मचारियों से तकनीकी एवं भौतिक निरीक्षण का कार्य कराए जाने के निर्देश पर कर्मचारी संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है।

उत्तर प्रदेश संभागीय परिवहन कर्मचारी संघ ने इस मामले में परिवहन आयुक्त को पत्र भेजकर आपत्ति दर्ज कराई है। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष संजय कुमार सिंह और प्रांतीय महामंत्री आशुतोष तिवारी ने स्पष्ट कहा है कि यह आदेश नियमों के विपरीत है और इससे कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव डाला जा रहा है।
संघ द्वारा भेजे गए पत्र के मुताबिक एक अप्रैल 2026 से 15 अप्रैल 2026 तक विशेष अभियान के तहत संभागीय और उपसंभागीय परिवहन कार्यालयों में कार्यरत लिपिक वर्ग के कर्मचारियों की ड्यूटी स्कूली वाहनों के तकनीकी और भौतिक निरीक्षण में लगाई गई है। इसके साथ ही, इन कर्मचारियों को निरीक्षण अधिकारी के रूप में पोर्टल पर लॉगिन आईडी भी जारी की जा रही है।
संघ का कहना है कि लिपिक वर्ग के कर्मचारियों के पास इस प्रकार के तकनीकी निरीक्षण का न तो प्रशिक्षण है और न ही उन्हें इस कार्य के लिए अधिकृत किया गया है। ऐसे में उनसे यह जिम्मेदारी लेना न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिन जनपदों में तकनीकी निरीक्षक के पद रिक्त हैं, वहां पर योग्य तकनीकी कर्मियों की नियुक्ति की जानी चाहिए। इसके बजाय लिपिकों से यह कार्य कराना विभागीय व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है।
संघ ने मांग की है कि इस आदेश को तत्काल प्रभाव से संशोधित किया जाए और लिपिक वर्ग के कर्मचारियों को उनके मूल कार्यों तक ही सीमित रखा जाए। साथ ही, तकनीकी निरीक्षण जैसे कार्य केवल प्रशिक्षित और योग्य कर्मचारियों से ही कराए जाएं।
प्रांतीय अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने कहा कि यदि इस आदेश को वापस नहीं लिया गया तो कर्मचारी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। वहीं महामंत्री आशुतोष तिवारी ने इसे कर्मचारियों के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि संघ इस मुद्दे को उच्च स्तर तक उठाएगा।
इस पूरे प्रकरण ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और मानव संसाधन प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि विभाग इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या कर्मचारियों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है या नहीं। इस पर सभी परिवहन विभाग के कर्मचारी की निगाहें टिकी हुई है।
Author: Chautha Prahari
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