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स्मार्ट मीटर में प्रीपेड अनिवार्यता खत्म,बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

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लखनऊ, 6 अप्रैल। देशभर के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने स्मार्ट मीटर को लेकर अपने पहले के आदेश में बड़ा बदलाव करते हुए प्रीपेड प्रणाली की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। अब घरों में लगने वाले स्मार्ट मीटर बिना प्रीपेड सिस्टम के भी लगाए जा सकेंगे।
यह निर्णय 1 अप्रैल 2026 को जारी नई अधिसूचना के तहत लिया गया है, जिसे केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा संशोधित किया गया है। इस फैसले को उपभोक्ता संगठनों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने लंबे समय से प्रीपेड सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाई थी। स्मार्ट मीटर में प्रीपेड की अनिवार्यता खत्म हो जाने से बिजली उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली है।

दरअसल, पहले सरकार की योजना के तहत स्मार्ट मीटर को पूरी तरह प्रीपेड मोड में लागू किया जा रहा था, जिसमें उपभोक्ताओं को पहले से रिचार्ज करना पड़ता था। रिचार्ज खत्म होते ही बिजली आपूर्ति स्वतः बंद हो जाती थी। इस व्यवस्था को लेकर आम जनता के बीच कई तरह की चिंताएं थीं, खासकर ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं में।
उपभोक्ता परिषद और अन्य संगठनों का कहना था कि प्रीपेड सिस्टम आम लोगों के लिए असुविधाजनक है और इससे बिजली जैसी जरूरी सेवा पर अनिश्चितता बढ़ जाती है। कई मामलों में तकनीकी गड़बड़ियों के कारण भी उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा था।

इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने अपने रुख में बदलाव किया है। अब स्मार्ट मीटर पोस्टपेड या हाइब्रिड मोड में भी लगाए जा सकेंगे, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प और सुविधा मिलेगी।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उपभोक्ताओं और बिजली कंपनियों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे जहां उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, वहीं बिजली वितरण कंपनियां भी अपनी सेवाओं को अधिक लचीला बना सकेंगी।
हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटरिंग की प्रक्रिया जारी रहेगी और इसे तेजी से लागू किया जाएगा। स्मार्ट मीटर से बिजली खपत का सटीक आंकलन, बिलिंग में पारदर्शिता और लाइन लॉस कम करने में मदद मिलती है।
लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई शहरों में पहले से ही स्मार्ट मीटर लगाने का काम चल रहा है। नए आदेश के बाद अब इस प्रक्रिया में और तेजी आने की संभावना है, क्योंकि उपभोक्ताओं का विरोध काफी हद तक कम हो जाएगा।
उपभोक्ता परिषद के पदाधिकारियों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह आम जनता के हित में लिया गया निर्णय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे भी बिजली से जुड़े अन्य मुद्दों पर इसी तरह उपभोक्ताओं की सहूलियत को प्राथमिकता दी जाएगी।
कुल मिलाकर, स्मार्ट मीटर को लेकर केंद्र सरकार का यह नया फैसला उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आया है और आने वाले समय में बिजली व्यवस्था को अधिक सुगम और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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