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महिला आरक्षण पर सियासत गरम: सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, विशेष सत्र में घमासान तय

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लखनऊ, 30 अप्रैल। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र से पहले प्रेस वार्ता में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इन दलों को महिला विरोधी बताते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर उनके रवैये की निंदा के लिए यह विशेष सत्र बुलाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने महिला सशक्तीकरण के मुद्दे पर सहयोग करने का मौका गंवा दिया।

सीएम योगी आदित्यनाथ प्रेस वार्ता में महिला आरक्षण पर बोलते हुए
सीएम योगी ने कहा कि जब भी समाजवादी पार्टी को सत्ता मिली, महिलाओं के खिलाफ अपराध और अत्याचार के मामले बढ़े। उन्होंने पुराने मामलों का जिक्र करते हुए विपक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह विशेष सत्र महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के मुद्दे को केंद्र में रखकर बुलाया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और सपा ने महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक में सहयोग नहीं किया। जबकि उनके पास अपनी छवि सुधारने का मौका था। लेकिन उन्होंने इस अवसर का इस्तेमाल नहीं किया।

विस्तार-मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में पूरे दिन इस विषय पर चर्चा होगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को मिले अधिकारों और अवसरों के लिए आभार व्यक्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
सीएम योगी ने कहा कि विपक्षी दल लंबे समय से महिला आरक्षण के रास्ते में बाधा बनते रहे हैं। इस बार विधानसभा में उनके रुख को खुलकर सामने लाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी विधायकों से अपील की कि वे चर्चा में भाग लें और साफ बताएं कि उन्होंने महिला आरक्षण के इस संशोधन का विरोध क्यों किया। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें लगता है कि उनके नेताओं से गलती हुई है, तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए और निंदा प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  के इस बयान से साफ है कि महिला आरक्षण का मुद्दा अब सिर्फ कानून तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन गया है। विधानसभा के इस विशेष सत्र के जरिए सत्तापक्ष इसे प्रमुख मुद्दा बनाना चाहता है।
दूसरी ओर, विपक्ष के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। अगर वे चर्चा में भाग लेते हैं, तो उन्हें अपने रुख को स्पष्ट करना होगा। और अगर दूरी बनाते हैं, तो इसका अलग संदेश जा सकता है।
राजनीतिक नजरिए से देखें तो महिला वोट बैंक हर चुनाव में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इस मुद्दे पर बयानबाजी और तेज हो सकती है। हालांकि, अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि जनता इस बहस को किस तरह लेती है।

भविष्य पर असर-इस मुद्दे पर विधानसभा में होने वाली चर्चा से प्रदेश की राजनीति और तेज होने की संभावना है। महिला आरक्षण जैसे मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है। इसका असर आने वाले चुनावों और राजनीतिक रणनीतियों पर भी पड़ सकता है।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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