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यूपी में ट्रांसफर नीति 2026-27 लागू:31 मई तक होंगे तबादले,

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सरकारी दफ्तरो में ट्रांसफर नीति लागू 31 मई तक होंगे तबादले

लखनऊ,04मई(चौ. प्र.)। उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2026-27 के लिए नई ट्रांसफर नीति लागू कर दी है। यह नीति सिर्फ इसी सत्र के लिए होगी। सभी विभागों में तबादले 31 मई 2026 तक पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मकसद है कि लंबे समय से एक ही जगह पर तैनात अधिकारियों का संतुलन बने और व्यवस्था बेहतर हो।

सरकारी दफ्तरो में ट्रांसफर नीति लागू 31 मई तक होंगे तबादले
नई नीति के तहत समूह ‘क’ और ‘ख’ के वे अधिकारी, जो किसी एक जिले में 3 साल पूरा कर चुके हैं, उनका तबादला किया जाएगा। वहीं जो अधिकारी एक ही मंडल में 7 साल पूरे कर चुके हैं, उन्हें भी दूसरे मंडल में भेजा जाएगा। हालांकि विभागाध्यक्ष या मंडलीय कार्यालय में जो समय बिताया गया है, उसे इस अवधि में नहीं जोड़ा जाएगा।
मंडलीय कार्यालयों में भी अब एक अधिकारी अधिकतम 3 साल ही तैनात रह सकेगा। यहां सबसे ज्यादा समय से काम कर रहे अधिकारियों को पहले हटाया जाएगा। इससे नए लोगों को मौका मिलेगा और काम में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है।
सरकार ने तबादलों की एक सीमा भी तय कर दी है। समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकतम 20 प्रतिशत कर्मचारियों का ही ट्रांसफर किया जाएगा। वहीं समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों के लिए यह सीमा 10 प्रतिशत रखी गई है। इसका मतलब है कि बड़े पैमाने पर तबादले नहीं होंगे, बल्कि जरूरत के हिसाब से ही बदलाव होगा।
समूह ‘ख’ और ‘ग’ के कर्मचारियों के तबादले अब ज्यादा पारदर्शी तरीके से होंगे। इसके लिए मेरिट बेस्ड ऑनलाइन ट्रांसफर सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे सिफारिश और दबाव की गुंजाइश कम होगी। पहले से जारी आदेशों के मुताबिक समूह ‘ग’ में पटल और क्षेत्र परिवर्तन भी सख्ती से लागू किया जाएगा।
सरकार ने संवेदनशील मामलों पर भी ध्यान दिया है। जिन कर्मचारियों के बच्चे गंभीर रूप से दिव्यांग हैं, उनके लिए खास व्यवस्था की गई है। ऐसे माता-पिता को उनकी पसंद और जरूरत के हिसाब से ऐसी जगह पोस्टिंग दी जाएगी, जहां इलाज और देखभाल की सुविधा हो।
इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा चिन्हित 8 जिलों और 34 जिलों के 100 आकांक्षी विकास खंडों में कर्मचारियों की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। इसका मकसद इन क्षेत्रों के विकास को तेज करना है।
एक और अहम बदलाव यह है कि ट्रांसफर सत्र खत्म होने के बाद भी जरूरत पड़ने पर तबादले किए जा सकेंगे। लेकिन इसके लिए विभागीय मंत्री के जरिए मुख्यमंत्री की मंजूरी जरूरी होगी। यह नियम समूह ‘क’ और ‘ख’ दोनों पर लागू होगा।
आगे क्या असर होगा
नई नीति से साफ संकेत मिलता है कि सरकार अब ट्रांसफर प्रक्रिया को ज्यादा संतुलित और पारदर्शी बनाना चाहती है। लंबे समय से एक जगह जमे अधिकारियों का बदलाव होगा, जिससे कामकाज में सुधार आ सकता है। ऑनलाइन सिस्टम लागू होने से विवाद भी कम होने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, सीमित संख्या में तबादले होने से कर्मचारियों में अनिश्चितता कम रहेगी। खास मामलों में दी गई राहत से मानवीय पहलू भी मजबूत होगा। कुल मिलाकर, यह नीति प्रशासन को व्यवस्थित करने और कामकाज को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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