लखनऊ के जानकीपुरम निवासी पीयूष कपूर ने बिना नौकरी छोड़े रचा इतिहास, एनआरआई और प्रोफेशनल्स के लिए बने प्रेरणा
लखनऊ, 6 मार्च।संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में लखनऊ के जानकीपुरम निवासी पीयूष कपूर ने 402वीं रैंक हासिल कर एक नई मिसाल पेश की है। खास बात यह है कि उन्होंने यह सफलता अमेरिका में रहते हुए और गूगल में स्टाफ सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्य करते हुए प्राप्त की है।
पिछले लगभग 10 वर्षों से अमेरिका में कार्यरत पीयूष कपूर वर्तमान में गूगल में स्टाफ सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम कर रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि उस धारणा को तोड़ती है कि यूपीएससी की तैयारी के लिए नौकरी छोड़ना या भारत में रहना जरूरी होता है।

परिवार का मिला मजबूत सहयोग
पीयूष कपूर ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को दिया। उन्होंने बताया कि उनके पिता अरुण कपूर, जो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, तथा उनकी मां रुचि कपूर और बड़े भाई आयुष कपूर इस पूरे सफर में उनकी प्रेरणा और ताकत बने रहे।
उन्होंने कहा कि परिवार के लगातार प्रोत्साहन और समर्थन के कारण ही वे इस मुकाम तक पहुंच सके।
टाइम जोन के अंतर को बनाया अपनी ताकत
पीयूष कपूर ने बताया कि अमेरिका और भारत के बीच समय का अंतर उनकी तैयारी के दौरान एक चुनौती भी था और एक अवसर भी।
उन्होंने कहा कि जब भारत में रात होती थी, तब अमेरिका में शांत माहौल में वे अपनी पढ़ाई करते थे। ऑफिस के बाद भारतीय समय के अनुसार ऑनलाइन मॉक टेस्ट देकर अपनी तैयारी को मजबूत करते थे।
पीयूष ने अपनी पूरी तैयारी को एक ‘डेटा-ड्रिवन प्रोजेक्ट’ की तरह मैनेज किया और नियमित विश्लेषण के आधार पर अपनी रणनीति में बदलाव करते रहे।
तकनीक और प्रशासन का मेल बनेगा देश के लिए अहम
पीयूष कपूर का मानना है कि एक सफल वैश्विक कॉरपोरेट करियर के बावजूद उनके मन में हमेशा देश के लिए कुछ करने की इच्छा रही है।
उन्होंने कहा कि तकनीक और प्रशासन का बेहतर समन्वय भारत के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
गूगल में लगभग 10 वर्षों के अनुभव ने उन्हें दबाव में शांत रहना और जटिल समस्याओं का विश्लेषण करना सिखाया, जिसका लाभ उन्हें यूपीएससी परीक्षा के हर चरण में मिला।
प्रोफेशनल्स और एनआरआई युवाओं के लिए प्रेरणा
पीयूष कपूर ने कहा कि उनकी यह यात्रा उन लाखों प्रोफेशनल्स और एनआरआई युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपनी नौकरी के साथ देश सेवा का सपना देखते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि स्पष्ट उद्देश्य, अनुशासन और परिवार का सहयोग मिले तो दुनिया के किसी भी कोने में रहकर भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की जा सकती है।
Author: Chautha Prahari
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