सब्सिडी से बदली नीरज पटेल की तकदीर, जरबेरा की खेती से हर साल 10 लाख तक कमाई
लखनऊ, 16 मार्च। उत्तर प्रदेश में किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए सरकार की विभिन्न योजनाएं असर दिखा रही हैं। पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब किसान बागवानी और फूलों की खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण बाराबंकी जिले के युवा किसान नीरज पटेल हैं, जिन्होंने सरकारी योजना की मदद से जरबेरा फूलों की खेती शुरू कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।
नीरज पटेल को राज्य सरकार की राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना का लाभ मिला, जिसके तहत उन्हें पॉलीहाउस लगाने के लिए ऋण और 50 प्रतिशत तक सब्सिडी प्राप्त हुई। आज वे आधुनिक तकनीक से फूलों की खेती कर हर साल लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं और आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं।

पारंपरिक खेती से अलग रास्ता चुना
नीरज पटेल का परिवार लंबे समय से पारंपरिक खेती करता रहा है। पढ़ाई पूरी करने के बाद नीरज ने खेती को ही अपना पेशा बनाने का निर्णय लिया, लेकिन उन्होंने पारंपरिक फसलों की जगह कुछ नया करने की ठानी। इसी दौरान वे उद्यान विभाग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां उन्हें जरबेरा फूलों की खेती के बारे में जानकारी मिली।
जरबेरा फूलों की खेती की संभावनाओं और बाजार में इसकी मांग के बारे में जानकर उन्होंने इसे अपनाने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने सरकार की राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत आवेदन किया और वर्ष 2018 में उन्हें लगभग 29 लाख 50 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। कुछ समय बाद उन्हें 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी मिल गई।
पॉलीहाउस तकनीक से आधुनिक खेती
नीरज पटेल ने अपने एक एकड़ खेत में पॉलीहाउस स्थापित किया, जिसकी लागत लगभग 70 से 75 लाख रुपये आई। पॉलीहाउस तकनीक के कारण पौधों को नियंत्रित वातावरण मिलता है, जिससे फूलों की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादन भी अधिक होता है।

आज उनके पॉलीहाउस में करीब 25 हजार जरबेरा पौधे लगे हुए हैं। इन पौधों की खास बात यह है कि एक बार लगाने के बाद यह लगभग छह साल तक लगातार उत्पादन देते हैं। इसके साथ ही उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली भी अपनाई है, जिससे पौधों को बूंद-बूंद पानी मिलता है और पानी की काफी बचत होती है।
रोजगार का भी बना माध्यम
नीरज पटेल की इस पहल से केवल उनकी आय ही नहीं बढ़ी, बल्कि आसपास के लोगों को भी रोजगार मिला है। उनके पॉलीहाउस में पांच लोग नियमित रूप से काम करते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
फूलों की खेती के लिए अपनाई गई तकनीक इजरायली पद्धति से प्रेरित है, जो कम संसाधनों में अधिक उत्पादन देने के लिए जानी जाती है। इसी कारण नीरज की खेती लगातार लाभदायक साबित हो रही है।
बाजार में अच्छी मांग
जरबेरा फूलों की बाजार में काफी मांग रहती है। शादी-समारोह, होटल सजावट, कार्यक्रमों और फूलों की सजावट में इनका व्यापक उपयोग होता है। इसी कारण नीरज पटेल को अपने फूलों की बिक्री में कोई खास कठिनाई नहीं होती।
नीरज बताते हैं कि सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें हर साल करीब 8 से 10 लाख रुपये तक की शुद्ध आय हो जाती है। उनका मानना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करें तो खेती को भी एक लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
नीरज पटेल की सफलता आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणादायक बन गई है। कई किसान उनसे पॉलीहाउस और फूलों की खेती की जानकारी लेने आते हैं।
उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं का सही लाभ उठाकर किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी और फूलों की खेती से अपनी आय बढ़ा सकते हैं। नीरज की यह सफलता कहानी यह साबित करती है कि सही जानकारी, तकनीक और सरकारी सहयोग से खेती में भी नई संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं।
Author: Chautha Prahari
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