लखनऊ, 05अगस्त(चौथा प्रहरी)। विधानसभा के मानसून सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। बुधवार को विधान भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत अनुपूरक बजट और उससे जुड़ी जनकल्याणकारी योजनाओं पर सार्थक चर्चा नहीं हो सकी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विधानसभा लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण मंच है, जहां जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीर बहस होनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि सदन की कार्यवाही लगातार बाधित होती है तो उसका सबसे बड़ा नुकसान प्रदेश के उन वर्गों को होता है जिनके लिए नई योजनाएं और अतिरिक्त बजट लाया जाता है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस बार का अनुपूरक बजट युवाओं, किसानों, महिलाओं, गरीबों, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष के व्यवहार को बताया अलोकतांत्रिक
पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा के भीतर सपा का रवैया लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने बहस के बजाय हंगामे का रास्ता अपनाया, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती थी कि विपक्ष अपनी आपत्तियां और सुझाव सदन के भीतर रखे, ताकि योजनाओं पर व्यापक चर्चा हो सके। उनके अनुसार लोकतंत्र में असहमति का सम्मान किया जाता है, लेकिन सदन की कार्यवाही को बाधित करना समाधान नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार प्रदेश के प्रत्येक वर्ग के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में भी विकास योजनाओं को गति मिलती रहेगी।
59 हजार करोड़ रुपये से अधिक के अनुपूरक बजट पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने 59 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया है। सरकार का दावा है कि इस बजट का उद्देश्य विभिन्न विकास योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना है।
सरकार के अनुसार इस बजट में प्रमुख रूप से निम्न क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है—
युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास कार्यक्रम।
किसानों के लिए कृषि और सिंचाई संबंधी प्रावधान।
महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाएं।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का विस्तार।
प्रदेश में सड़क, एक्सप्रेसवे और अन्य आधारभूत ढांचे के विकास के लिए अतिरिक्त धनराशि।
मुख्यमंत्री का कहना था कि यदि सदन में सामान्य चर्चा होती तो इन योजनाओं के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जा सकता था।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लेकर सरकार के दावे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित महिला पेंशन और दिव्यांगजन पेंशन जैसी योजनाओं के विस्तार और नए पात्र लाभार्थियों को जोड़ने के लिए भी अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था की है।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि समाज के कमजोर वर्गों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे। मुख्यमंत्री के अनुसार सदन में इन विषयों पर चर्चा होने से योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर और सुझाव मिल सकते थे, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण यह अवसर सीमित रह गया।
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए नई व्यवस्था का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने पत्रकार वार्ता में जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आउटसोर्सिंग कमीशन के गठन का निर्णय लिया है। उनके अनुसार इसका उद्देश्य आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मानदेय और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि बजट में इस संबंध में आवश्यक वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। इसके साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, ग्राम चौकीदारों, रसोइयों और कोटेदारों के मानदेय तथा प्रोत्साहन राशि बढ़ाने के लिए भी व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा से पारित होने के बाद बजट विधान परिषद में जाएगा और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभिन्न योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
शिक्षा और कर्मचारी हितों से जुड़े फैसलों का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों से जुड़े फैसलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले की तुलना में शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाया है। इसी प्रकार अनुदेशकों के मानदेय में भी वृद्धि की गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार सरकार का प्रयास केवल नई योजनाएं शुरू करना नहीं बल्कि पहले से कार्यरत कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना भी है।
सामाजिक न्याय से जुड़े प्रस्तावों का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुपूरक बजट में सामाजिक न्याय के लिए कार्य करने वाले महापुरुषों के सम्मान से जुड़े कार्यों के लिए भी प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, महर्षि वाल्मीकि, संत रविदास, महात्मा ज्योतिबा फुले, शाहूजी महाराज और लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर सहित कई महापुरुषों की प्रतिमाओं के संरक्षण, छाजन, पार्क और बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए लगभग 407 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष के विरोध के कारण इन विषयों पर भी अपेक्षित चर्चा नहीं हो सकी, हालांकि विधानसभा ने अनुपूरक मांगों को पारित कर दिया है।
विधानसभा में टकराव के राजनीतिक मायने
विधानसभा का मानसून सत्र इस बार राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे के कारण चर्चा में रहा। सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष ने विकास और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा नहीं होने दी, जबकि विपक्ष लगातार सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश करता रहा।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। जहां सरकार अपनी नीतियों और योजनाओं का पक्ष रखती है, वहीं विपक्ष उन योजनाओं पर सवाल उठाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास करता है। ऐसे में सदन की कार्यवाही बाधित होने पर कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा का अवसर सीमित हो जाता है।
आगे क्या होगा?
विधानसभा से अनुपूरक बजट पारित होने के बाद अब इसे विधान परिषद से भी पारित कराया जाएगा। विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभिन्न विभागों को बजट आवंटित किया जाएगा और योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि सरकार द्वारा घोषित अतिरिक्त बजटीय प्रावधानों का लाभ कितनी तेजी से लाभार्थियों तक पहुंचता है और जिन योजनाओं की घोषणा की गई है, उनका जमीनी स्तर पर क्या प्रभाव दिखाई देता है।
चौथा प्रहरी का नज़रिया
उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र केवल राजनीतिक टकराव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यह भी दिखाया कि सदन में संवाद और बहस कितनी आवश्यक है। सरकार ने अनुपूरक बजट को जनकल्याणकारी बताया है, जबकि विपक्ष ने अपने विरोध का रास्ता चुना। लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती इसी में है कि महत्वपूर्ण बजट और नीतिगत फैसलों पर विस्तृत चर्चा हो, ताकि जनता तक सभी पक्षों की बात पहुंचे और योजनाओं के प्रभाव का निष्पक्ष आकलन किया जा सके। चौथा प्रहरी तथ्यों पर आधारित, संतुलित और जनहित केंद्रित पत्रकारिता के पक्ष में है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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