अयोध्या, 02 अप्रैल। देश के प्रमुख उद्योगपति Gautam Adani ने गुरुवार को अयोध्या पहुंचकर प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान उनके साथ परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। दर्शन के बाद उन्होंने इस पल को अपने जीवन का “गौरवपूर्ण क्षण” बताते हुए कहा कि यह अनुभव उनके लिए अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक रहा।

अडानी ने कहा कि Ram Mandir Ayodhya केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आत्मविश्वास का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम के आदर्श आज भी समाज को सत्य, सेवा और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें और उनके परिवार को प्रभु श्री राम के दर्शन करने का जो सौभाग्य प्राप्त हुआ है, वह उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक है। उन्होंने देशवासियों के लिए प्रार्थना करते हुए कहा कि भगवान श्री राम का आशीर्वाद सभी पर बना रहे और भारत निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे।
दर्शन-पूजन के बाद Gautam Adani ने अयोध्या के एक गुरुकुल का भी दौरा किया। यहां उन्होंने बच्चों के साथ समय बिताया और उनके साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने गुरुकुल शिक्षा प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि आज के आधुनिक युग में भी गुरुकुल भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
अडानी ने कहा कि बदलते समय और तकनीक के इस दौर में, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के युग में, यह जरूरी है कि हम अपनी जड़ों और परंपराओं को न भूलें। उन्होंने कहा कि गुरुकुल जैसी संस्थाएं आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन बनाए रखने का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि Adani Foundation गुरुकुल संस्कृति को मजबूत करने के लिए हर संभव सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि यदि गुरुकुलों को किसी भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता होगी, तो अडानी फाउंडेशन हर स्तर पर समर्थन देने के लिए तैयार है।
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अयोध्या देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बन चुका है। राम मंदिर के निर्माण के बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है और बड़े उद्योगपति, राजनेता तथा अन्य गणमान्य लोग भी यहां पहुंचकर दर्शन कर रहे हैं।
अडानी के इस दौरे को न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके द्वारा गुरुकुल शिक्षा को समर्थन देने की पहल से पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को नई दिशा और ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब देश के बड़े उद्योगपति भारतीय संस्कृति और परंपरा के संरक्षण के लिए आगे आते हैं, तो इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।
अंत में, अडानी ने पुनः भगवान श्री राम से देश की समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रार्थना की और कहा कि भारत को विश्व में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।
Author: Chautha Prahari
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