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योगी आदित्यनाथ से जुड़े वायरल वीडियो पर पत्रकार को लीगल नोटिस, एडवोकेट रीना एन सिंह के माध्यम से कार्रवाई

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लखनऊ, 15 अप्रैल। योगी आदित्यनाथ से जुड़े एक वायरल वीडियो को लेकर प्रदेश में एक नया विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित इस वीडियो के संबंध में एक पत्रकार को लीगल नोटिस भेजा गया है। नोटिस में विवादित कंटेंट को हटाने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, एक इंटरव्यू क्लिप को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किया गया था, जिसके बाद कुछ संगठनों और व्यक्तियों ने इस पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि वीडियो में प्रस्तुत किए गए कथित बयान और उसके साथ प्रयुक्त शीर्षक से समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
इसी मामले में संबंधित पक्ष की ओर से रीना एन सिंह के माध्यम से लीगल नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि वायरल किए गए वीडियो के कुछ अंशों को आपत्तिजनक और भ्रामक बताया जा रहा है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि वीडियो की प्रस्तुति एक संवेदनशील विषय को विवादित रूप में पेश करती है।



लखनऊ में वायरल वीडियो विवाद पर लीगल नोटिस का प्रतीकात्मक चित्र
नोटिस भेजने वालों में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इस प्रकार के कंटेंट से सामाजिक सद्भाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और लोगों के बीच गलतफहमी फैल सकती है।

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट रीना एन सिंह का नोटिस
नोटिस में संबंधित पत्रकार से मांग की गई है कि वह तत्काल प्रभाव से उक्त वीडियो और उससे जुड़े सभी डिजिटल कंटेंट को हटाएं। इसके साथ ही सार्वजनिक रूप से माफी जारी करने की भी अपेक्षा की गई है। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में इस प्रकार की सामग्री का प्रसारण न किया जाए।
यदि निर्धारित समय के भीतर इन मांगों का पालन नहीं किया जाता है, तो संबंधित पक्ष द्वारा आगे कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। हालांकि, इस मामले में अभी तक पत्रकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कानूनी दृष्टि से देखें तो ऐसे मामलों में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधान लागू हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी डिजिटल कंटेंट से सामाजिक सौहार्द, सार्वजनिक व्यवस्था या किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने की आशंका होती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव है।

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट रीना एन.सिंह द्वारा भेजे गए नोटिस
डिजिटल युग में जहां सोशल मीडिया सूचना का सबसे तेज माध्यम बन चुका है, वहीं इसकी जिम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ गई है। बिना पुष्टि के किसी भी कंटेंट को साझा करना कई बार विवाद और कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है।
फिलहाल यह मामला कानूनी प्रक्रिया में है और आने वाले समय में इस पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

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