ममता बनर्जी और भाजपा के रिश्तों का लंबा सफर,समय के साथ बदलती रही राजनीति
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर कई अहम मोड़ों से गुजरा है। 1997 में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर All India Trinamool Congress (टीएमसी) की स्थापना की। उस समय उनका मुख्य फोकस राज्य में वामपंथी दलों को चुनौती देना था।

शुरुआत और भाजपा के साथ सहयोग
1999 में ममता बनर्जी ने National Democratic Alliance (एनडीए) सरकार का साथ दिया और रेल मंत्री बनीं। यह वह दौर था जब उनकी पार्टी ने Bharatiya Janata Party (भाजपा) के साथ राजनीतिक तालमेल बनाया।
2001 में रक्षा सौदों से जुड़े विवाद सामने आने के बाद उन्होंने एनडीए सरकार से अलग होने का फैसला लिया। हालांकि, उसी साल एक इंटरव्यू में उन्होंने भाजपा को “स्वाभाविक सहयोगी” बताया था।
2003 में फिर वापसी
2003 में ममता बनर्जी एक बार फिर एनडीए सरकार में शामिल हुईं। इस दौरान कुछ समय तक वह बिना विभाग के मंत्री भी रहीं।
इसी अवधि में Rashtriya Swayamsevak Sangh (आरएसएस) से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी भी चर्चा में रही।
राजनीतिक रुख में बदलाव
आने वाले वर्षों में ममता बनर्जी का राजनीतिक रुख बदला। 2019 में उन्होंने NRC और CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए और अपनी अलग राजनीतिक लाइन दिखाई।
हालांकि, संसद में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर मतदान के दौरान उनकी पार्टी के कुछ सांसद अनुपस्थित रहे। इस मुद्दे पर राजनीतिक हलकों में चर्चा भी हुई, लेकिन पार्टी की ओर से कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई।
2022 और उसके बाद
2022 में उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने विपक्षी उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया। उनकी पार्टी के सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया, जिससे Jagdeep Dhankhar की जीत हुई।
इसी साल उन्होंने एक बयान में Rashtriya Swayamsevak Sangh के कुछ सदस्यों की सराहना भी की थी।
2024 चुनाव और रणनीति
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बने विपक्षी गठबंधन INDIA में भी ममता बनर्जी की भूमिका सीमित रही। उन्होंने कई मुद्दों पर अलग रुख अपनाया और अंततः चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया।
इस दौरान Nitish Kumar के साथ उनके मतभेद भी सामने आए। बाद में नितीश कुमार ने अपनी राजनीतिक दिशा बदल ली।
लोकसभा चुनाव 2024 में Narendra Modi के नेतृत्व में भाजपा ने जीत दर्ज की। इसके बाद विपक्षी राजनीति और गठबंधन की रणनीतियों पर नई चर्चा शुरू हुई।
आगे क्या असर पड़ेगा
ममता बनर्जी का यह राजनीतिक सफर बताता है कि भारतीय राजनीति में गठबंधन और रिश्ते समय के साथ बदलते रहते हैं।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि टीएमसी राष्ट्रीय स्तर पर किस तरह की रणनीति अपनाती है और क्या वह किसी बड़े गठबंधन का हिस्सा बनती है या स्वतंत्र राह पर आगे बढ़ती है।
इसका असर आने वाले चुनावों और विपक्ष की एकता पर भी पड़ सकता है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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