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 यूपी में 20 हजार नए शिक्षक और अनुदेशकभर्ती होंगे, मानदेय बढ़ाकर 17 हजार किया गया

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लखनऊ,17 मई(चौथा प्रहरी)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश में बेसिक शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए 20 हजार नए शिक्षक और अनुदेशकों की भर्ती की जाएगी। उन्होंने बताया कि 10 हजार नए शिक्षकों का अधियाचन शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजा जा चुका है। साथ ही उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नए अनुदेशकों की नियुक्ति भी की जाएगी।
मुख्यमंत्री रविवार को लखनऊ के लोकभवन सभागार में आयोजित 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान समारोह और बढ़े हुए मानदेय के चेक वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह करने और 5 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य बीमा सुविधा देने की घोषणा को बड़ा कदम बताया।
सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2011-12 में अंशकालिक अनुदेशकों की नियुक्ति शुरू हुई थी। उस समय उन्हें 7 हजार रुपये मानदेय मिलता था। लंबे समय तक इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। वर्ष 2022 में सरकार ने 2 हजार रुपये बढ़ाए, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि बेसिक शिक्षा से जुड़े हर कर्मचारी को सम्मान और सामाजिक सुरक्षा मिले।
मुख्यमंत्री ने सभी अनुदेशकों से बेसिक शिक्षा परिषद के पोर्टल पर जल्द पंजीकरण कराने को कहा। उन्होंने बताया कि अगले सप्ताह स्वास्थ्य कार्ड भी वितरित किए जाएंगे, जिससे अनुदेशक और उनके परिवार 5 लाख रुपये तक की कैशलेस इलाज सुविधा का लाभ ले सकेंगे।

लखनऊ में अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान समारोह को संबोधित करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश के लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और शिक्षकों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सरकार पहले ही महिला अनुदेशकों को छह माह का मातृत्व अवकाश और विद्यालय परिवर्तन की सुविधा दे चुकी है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में हुए बदलाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में स्कूलों की हालत खराब थी, लेकिन ‘स्कूल चलो अभियान’ और ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के जरिए स्थिति बदली गई। अब 96 प्रतिशत बेसिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं पहुंच चुकी हैं। ड्रॉपआउट दर 17-18 प्रतिशत से घटकर करीब 3 प्रतिशत रह गई है। सरकार का लक्ष्य इसे शून्य तक लाना है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और अनुदेशकों से बच्चों की प्रतिभा पहचानने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर बच्चा किसी न किसी क्षेत्र में प्रतिभाशाली होता है। जरूरत उसे सही दिशा देने की है। उन्होंने कहा कि बच्चों को अनुशासन, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता की सीख देना भी शिक्षा का अहम हिस्सा है।
सीएम योगी ने मीडिया से भी अपील की कि बच्चों के श्रमदान को गलत तरीके से पेश न किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को जरूरत से ज्यादा कमजोर और निर्भर बनाने के बजाय मजबूत और जिम्मेदार बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सरकार स्कूलों में समय पर किताबें उपलब्ध कराएगी। यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और दूसरी सुविधाओं के लिए अभिभावकों के खातों में सीधे पैसा भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 1 करोड़ 60 लाख बच्चे बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने अटल आवासीय विद्यालयों और मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालयों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गरीब और श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और आधुनिक सुविधाएं देने के लिए सरकार लगातार नए संस्थान विकसित कर रही है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का विस्तार भी किया जा रहा है ताकि गरीब बेटियों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
कार्यक्रम में Brajesh Pathak, Sandeep Singh, Manoj Kumar Pandey समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
भविष्य पर असर
सरकार की नई भर्ती और बढ़े हुए मानदेय का असर सीधे बेसिक शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। इससे स्कूलों में शिक्षक संख्या बढ़ेगी, छात्र-शिक्षक अनुपात सुधरेगा और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं से अनुदेशकों का मनोबल भी बढ़ेगा।

 

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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