चीन द्वारा तिब्बत में सैन्य हस्तक्षेप के उपरांत तिब्बत की राजनीतिक सांस्कृतिक एवं धार्मिक स्वतंत्रता समाप्त कर दी गई- नीरज सिंह
लखनऊ, चौथा प्रहरी 24 नवंबर। निर्वासित तिब्बती सरकार (केंद्रीय तिब्बती प्रशासन-सीटीए) के राष्ट्रपति पेम्पा त्सेरिंग के लखनऊ प्रवास पर भाजपा वरिष्ठ नेता और फिक्की चेयरमैन नीरज सिंह ने आईएमआरटी बिजनेस स्कूल गोमती नगर में आयोजित कार्यक्रम में उनका स्वागत किया और “पर्यावरण सुरक्षा और शांति” विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में भारत और तिब्बत की संस्कृति, सुरक्षा और आपसी संबंधों पर परिचर्चा की।तिब्बत के अंदर की मौजूदा स्थितियों पर पेम्पा त्सेरिंग ने चीन की दमनकारी नीतियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा की एक दिन ऐसा जरूर आएगा, जब तिब्बत आजाद होगा। हम हथियार नहीं उठाएंगे, क्योंकि धर्म इसकी इजाजत नहीं देता है। दलाईलामा के व्यावहारिक और शांति पूर्ण मार्ग पर चलकर हम देश को आजाद कराने के लिए काम कर रहे हैं।भारत और तिब्बत की सुरक्षा और मुद्दे एक-दूसरे से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।भारत के साथ हमारा रिश्ता बहुत ही पारदर्शी है।चीन के सरकार के लोग तिब्बत में अधिकतर समय गुजारते हैं। चीन दलाई लामा चुनने की तैयारी कर रहा है, लेकिन इससे चुनने का अधिकार सिर्फ हमारा है।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तिब्बत ने नालंदा परंपरा की बौद्ध शिक्षाओं को सहेज कर रखा है, जो इसे प्राचीन भारतीय ज्ञान के महत्वपूर्ण भंडार के रूप में स्थापित करता है। उन्होंने दशकों से तिब्बती समुदाय के अस्तित्व को बनाए रखने में भारत सरकार और यहां के लोगों के निरंतर समर्थन के लिए आभार यक्त किया। उन्होंने तिब्बत में चीन द्वारा की जा रही बड़े पैमाने पर बांध निर्माण परियोजनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की।फिक्की चेयरमैन नीरज सिंह ने कहा कि चीन द्वारा तिब्बत में सैन्य हस्तक्षेप के बाद तिब्बत की राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्वतंत्रता धीरे-धीरे समाप्त कर दी गई, जिससे बड़े पैमाने पर मानवाधिकार संकट और जनसंख्या संरचना में बदलाव आए। तिब्बत की निर्वासित सरकार और दलाई लामा आज भी वास्तविक स्वायत्तता और सांस्कृतिक संरक्षण की मांग उठाते हैं। भारत और तिब्बत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध प्रगाढ़ रहे हैं।तिब्बत भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।नीरज सिंह ने अटल के वक्तव्य को दोहराते हुए कहा कि हम अपने दोस्त बदल सकते हैं लेकिन अपने पड़ोसी नहीं बदल सकते। भारत तिब्बत की धार्मिक स्वतंत्रता और अहिंसक संघर्ष के समर्थन में हमेशा साथ खड़ा रहा है।
मीडिया प्रभारी प्रवीण गर्ग ने बताया कि भारत तिब्बत और चीन की भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर परिचर्चा में डी आर बंसल, डा. संजय शुक्ला, प्रोफेसर वीएन मिश्रा और एमके झा भी अपने विचार रखें।परिचर्चा से पूर्व आईएमआरटी कॉलेज की छात्राओं ने स्वागत कार्यक्रम में गणेश वंदना और भारतीय संस्कृति के नृत्य की प्रस्तुति भी की।
Author: Chautha Prahari
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