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लखनऊः पत्रकारिता की गरिमा और पहचान के लिए एकजुट हुई कलम की ताकत

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ड्रेस कोड अभियान बना पत्रकारों की एकता का प्रतीक,विधान भवन के सामने दिखी चौथे स्तंभ की संगठित चेतना


लखनऊ 29 जनवरी। पत्रकारिता के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी पहल के रूप में उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित) के संयोजक वरिष्ठ पत्रकार प्रभात त्रिपाठी के आह्वान पर गुरुवार को विधान भवन के सामने पत्रकारों की अभूतपूर्व एकजुटता देखने को मिली। यह आयोजन किसी एक व्यक्ति का निजी अभियान नहीं, बल्कि पत्रकारिता की सामूहिक पहचान, गरिमा और एकता को पुनः स्थापित करने की दिशा में उठाया गया सशक्त कदम माना जा रहा है।

समिति के संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि ड्रेस कोड अभियान किसी विचारधारा को थोपने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह पत्रकारों के बीच अनुशासन, सम्मान और सामाजिक पहचान को मजबूत करने का एक सकारात्मक प्रयास है। उन्होंने कहा कि सहमति और असहमति लोकतंत्र की आत्मा है, किंतु आपसी कटुता, कटाक्ष और व्यक्तिगत आक्षेप पत्रकारिता की साख को कमजोर करते हैं। यदि हम अपने चौथे स्तंभ को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाना चाहते हैं, तो हमें पहले आपसी एकजुटता और मर्यादा को अपनाना होगा।प्रभात त्रिपाठी ने कहा कि विचारधाराएं भिन्न हो सकती हैं, मत अलग हो सकते हैं, लेकिन हम सभी समाज के पढ़े-लिखे, जिम्मेदार और सच के पक्षधर कलम के सिपाही हैं। एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे उनसे कोई सहमत हो या असहमत, यहां तक कि व्यक्तिगत आलोचना भी करे, लेकिन वे जीवनपर्यंत पत्रकारों के अधिकार, सम्मान और हितों के लिए संघर्ष करते रहेंगे।इस आह्वान का असर साफ दिखाई दिया। लखनऊ के पत्रकार विधान भवन के सामने एकत्र हुए और यह संदेश दिया कि पत्रकार समाज बिखरा हुआ नहीं है, बल्कि समय आने पर एकजुट होकर अपनी पहचान और गरिमा के लिए खड़ा हो सकता है। ड्रेस कोड में पहुंचे पत्रकारों ने यह साबित किया कि वे न केवल समाज का एक शिक्षित वर्ग हैं, बल्कि अनुशासन और संयम के साथ अपनी बात रखने की क्षमता भी रखते हैं।कार्यक्रम के अंत में प्रभात त्रिपाठी ने सभी पत्रकार साथियों से हाथ जोड़कर अपील की कि यह अभियान किसी व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि अपनी सामूहिक पहचान के लिए है। इसे उन्होंने पत्रकारिता की पहचान स्थापित करने का महायज्ञ बताते हुए आगे कार्यक्रमों अधिक से अधिक सहभागिता का आह्वान किया। आयोजन ने यह साफ कर दिया कि जब कलम एकजुट होती है, तो उसकी ताक़त पूरे समाज को दिशा देने में सक्षम होती है। कई दर्जन पत्रकार एकत्र होकर एक साथ फोटो खिंचवाई और प्रभात त्रिपाठी द्वारा ड्रेस भी वितरित की गई। उक्त आयोजन में विजय शंकर पंकज, भास्कर दुबे,शाश्वत तिवारी,अविनाश चंद्र शुक्ला,उमेश चंद्र मिश्रा,अजीत कुमार सिंह,रवि उपाध्याय,अजय वर्मा,आईना, सर्वजीत सिंह सूर्यवंशी अपवा, रूपेनद उपाध्याय, ज्ञानेश पाठक,विजय दुबे, नैमिष प्रताप सिंह,लखन लाल मिश्र, राष्ट्रीय संरक्षक ,पत्रकार विकास काउंसिल,उमाकांत बाजपेई,विक्रम राव, संत प्रसाद शुक्ला, त्रिनाथ शर्मा,,दीपक गुप्ता अशोक चकलाधर बलराम गुप्ता सोनू भारती, जे बी सिह विवेक सिंह,गंगा प्रसाद दीक्षित, श्वेता सिंह, अर्चना गुप्ता, पृथ्वी पाल, परमजीत सिंह,सुभाष मिश्र, बबीता ओबेरॉय, हिमांशु भटनागर, विवेक कुमार राय, इकबाल, गुरमीत कौर, मनीष चित्रांश,विनय प्रकाश सिंह, कवल जीत सिंह, आलोक गुप्ता, संगीता शर्मा,राजकिशोर बारी,मनी तिवारी,प्रियंका गुप्ता आदि दर्जनों पत्रकार शामिल हुए। अंत में समिति के संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने सभी का आभार व्यक्त किया और आगे भी इसी तरह के कार्यक्रम पत्रकारों के उत्थान के लिए आयोजित करने का भरोसा दिलाया और सभी के सहयोग की अपेक्षा की।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

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