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रुदौली में भ्रष्टाचार पर बड़ा एक्शन: बीडीओ अमित त्रिपाठी सस्पेंड, मनरेगा फंड में गड़बड़ी के आरोप

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अयोध्या, 24 मार्च।
जनपद अयोध्या के रुदौली ब्लॉक में तैनात खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) अमित त्रिपाठी के खिलाफ शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई सरकारी योजनाओं में अनियमितता और शिकायतों की पुष्टि के बाद की गई है, जिससे प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश पर प्रमुख सचिव अनिल कुमार द्वारा 23 मार्च को निलंबन आदेश जारी किया गया। आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान त्रिपाठी को ग्राम विकास आयुक्त कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, रुदौली क्षेत्र के कई ग्राम प्रधानों ने बीडीओ के कार्यशैली और निर्णयों को लेकर गंभीर शिकायतें दर्ज कराई थीं। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि अधीनस्थ कर्मचारियों के वेतन को अनुचित तरीके से रोका गया और बिना ठोस आधार के प्रतिकूल प्रविष्टियां दी गईं। साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार और दबाव बनाने के भी आरोप सामने आए थे।
सबसे गंभीर आरोप महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से जुड़े बताए जा रहे हैं। जांच में यह बात सामने आई कि कार्यों की स्वीकृति के बदले कथित तौर पर 10 प्रतिशत तक की अवैध वसूली की जा रही थी। यह आरोप सामने आने के बाद शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई।
प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर शासन ने बिना देरी किए निलंबन की कार्रवाई कर दी। इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह संकेत गया है कि सरकारी योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अमित त्रिपाठी का रुदौली ब्लॉक से पुराना नाता रहा है। इससे पहले भी वह यहां तैनात रह चुके हैं। इसके अलावा वह बीकापुर ब्लॉक में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। पिछली तैनातियों के दौरान भी उनका नाम विवादों में रहा, जिसके चलते उनका स्थानांतरण जिले से बाहर कर दिया गया था।
बताया जा रहा है कि बाराबंकी में तैनाती के दौरान भी उनकी कार्यशैली को लेकर सवाल उठे थे। हालांकि, बाद में वह दोबारा अयोध्या जिले में रुदौली ब्लॉक में नियुक्त होने में सफल रहे। इस नियुक्ति के पीछे स्थानीय राजनीतिक समर्थन की भी चर्चा होती रही है।
लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग रहीं। ग्राम प्रधानों की सामूहिक शिकायतों और जांच में सामने आए तथ्यों ने उन्हें बचने का मौका नहीं दिया। माना जा रहा है कि प्रशासन अब ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रहा है।
इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य विकास खंडों में भी सतर्कता बढ़ गई है। अधिकारी अब अपने कार्यों में अधिक पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

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