पैसे न देने पर जमानत रद्द होगी, पुलिस को निगरानी के निर्देश-पीड़िता की ओर से एडवोकेट रीना एन सिंह ने रखे मजबूत तर्क
नई दिल्ली, 1 अप्रैल।देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने आदेश दिया है कि बंधक बनाकर पीड़िता से जन्मी बच्ची के भरण-पोषण के लिए आरोपी हर महीने ₹40,000 देगा। यदि वह ऐसा नहीं करता है, तो उसकी जमानत रद्द कर दी जाएगी।

यह मामला उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले से जुड़ा है, जहां अक्टूबर 2017 में एक 50 वर्षीय महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना हुई थी। उसी रात आरोपियों ने उसकी 19 वर्षीय बेटी का अपहरण कर लिया। इसके बाद युवती को लगभग 5 वर्षों तक बंधक बनाकर रखा गया और अक्टूबर 2023 तक उसके साथ लगातार शारीरिक व मानसिक शोषण किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची की पीठ ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर विचार किया। अदालत के सामने यह भी तथ्य आया कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर पीड़िता से जबरन विवाह का नाटक रचा था, ताकि अपराध को छुपाया जा सके।
बंधक बनाए जाने के दौरान वर्ष 2018 में पीड़िता ने एक बच्ची को जन्म दिया, जिसकी वर्तमान उम्र लगभग 6 वर्ष है। इस बीच, मां के साथ हुए सामूहिक बलात्कार के मामले में आरोपियों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी थी।
पीड़िता की ओर से अधिवक्ता रीना एन सिंह ने अदालत में जोरदार बहस की और बच्ची के भविष्य एवं भरण-पोषण का मुद्दा उठाया। उनके तर्कों को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को सख्त निर्देश दिए।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य आदेश
आरोपी हर महीने की 10 तारीख तक ₹40,000 पीड़िता के खाते में जमा करेगा
रकम बच्ची के भरण-पोषण के लिए होगी
भुगतान में देरी या चूक होने पर जमानत रद्द की जा सकती है
पीड़िता या उसके परिवार से किसी भी प्रकार का विवाद जमानत का दुरुपयोग माना जाएगा
बच्ची की कस्टडी में हस्तक्षेप करने पर भी सख्त कार्रवाई होगी
इसके अलावा अदालत ने फिरोजाबाद जिले के नारखी थाना प्रभारी को निर्देश दिया है कि वह आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होने पर तुरंत कार्रवाई करें।
🧑⚖️ क्यों अहम है यह फैसला?
यह फैसला कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहली बार अदालत ने न सिर्फ अपराध की गंभीरता को स्वीकार किया, बल्कि उससे जन्मे बच्चे के भविष्य को भी प्राथमिकता दी। यह आदेश उन मामलों के लिए मिसाल बन सकता है, जहां पीड़िताओं को न्याय के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा की भी आवश्यकता होती है।
📊 सामाजिक संदेश
यह निर्णय समाज में यह स्पष्ट संदेश देता है कि महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों में शामिल आरोपियों को केवल जमानत मिलना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का भी निर्वहन करना होगा। साथ ही, यह पीड़िताओं के अधिकारों को मजबूत करता है।
Author: Chautha Prahari
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