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यूपी बनेगा साइबर सिक्योरिटी का ग्लोबल हब! फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट से तैयार होंगे 500+ साइबर योद्धा

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योगी सरकार का बड़ा कदम—AI फिशिंग, डीपफेक और वॉइस क्लोनिंग जैसे खतरों से निपटेगा यूपी

लखनऊ, 1 अप्रैल। राजधानी में साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी पहल सामने आई है, जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत साइबर डिफेंस हब के रूप में स्थापित कर सकती है। बदलते डिजिटल अपराधों पर लगाम कसने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया है।
राजधानी लखनऊ स्थित इस संस्थान में 500 से अधिक साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों को तैयार किया जा रहा है, जिन्हें भविष्य के डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। ये विशेषज्ञ सीमापार हैकिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फिशिंग, डीपफेक, वॉइस क्लोनिंग और अन्य उभरते साइबर खतरों का मुकाबला करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

लखनऊ में साइबर सुरक्षा के लिए तैयार हो रहे 500 साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञ
साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर साइबर सुरक्षा को लेकर विशेष रणनीति तैयार की गई है। इसी क्रम में संस्थान में “मीट माई मेंटोर” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रमुख साइबर और क्वांटम तकनीक विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के सदस्य डॉ. अजय सिंह ने संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि यह तेजी से विश्वस्तरीय बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने बताया कि आज के समय में साइबर अपराध केवल ईमेल या मैसेज तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि वॉइस क्लोनिंग, डीपफेक वीडियो और फर्जी वीडियो कॉल के माध्यम से भी बड़े स्तर पर अपराध किए जा रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब ऐसे मालवेयर विकसित हो रहे हैं जो स्वयं सीखने और विकसित होने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर नई तकनीकों को अपनाना जरूरी हो गया है। इस दिशा में यह फॉरेंसिक संस्थान अत्यंत प्रभावी साबित होगा।
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी आधुनिक तकनीकें आने वाले समय में आम जीवन का हिस्सा बन जाएंगी। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि यह समय खुद को भविष्य के लिए तैयार करने का है, जहां तकनीकी, कानूनी और फॉरेंसिक ज्ञान का समन्वय बेहद जरूरी होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि इस संस्थान को एक “वन स्टॉप सेंटर” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां साइबर सुरक्षा और क्वांटम तकनीक से जुड़े हर अत्याधुनिक विषय का समाधान उपलब्ध होगा। इससे न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश को लाभ मिलेगा।
इस पहल के जरिए उत्तर प्रदेश अब वैश्विक स्तर पर साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हो रहा है। संस्थान का उद्देश्य छात्रों को इस तरह प्रशिक्षित करना है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकें।
कार्यक्रम के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ भी मौजूद रहे, जिन्होंने छात्रों को साइबर सुरक्षा के बदलते स्वरूप और भविष्य की चुनौतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तेजी से डिजिटल तकनीक विकसित हो रही है, उसी तेजी से साइबर अपराध भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में इस तरह की पहल न केवल समय की मांग है, बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी है।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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