लखनऊ, 26 अप्रैल। राजधानी के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में तीन दिन तक चला रश्मिरथी पर्व रविवार को खत्म हो गया। आखिरी दिन बाल गंगाधर तिलक और अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान पर चर्चा हुई। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। बड़ी संख्या में युवा, साहित्य प्रेमी और बुद्धिजीवी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति के नारे भी लगे। इस तरह के कार्यक्रम के दूरगामी परिणाम आते हैं।

इस आयोजन का मकसद युवाओं को देश के महापुरुषों के विचारों से जोड़ना था। मंच के जरिए तिलक के स्वराज और आत्मसम्मान के संदेश को दिखाया गया। वहीं अटल जी की कविताओं पर आधारित प्रस्तुति ने लोगों को भावुक कर दिया।
कार्यक्रम में सुरेश खन्ना, अश्वनी चौबे और नीरज सिंह समेत कई नेता मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को सही दिशा देते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि जिन महापुरुषों पर यह कार्यक्रम आधारित है, उनके जीवन पर लंबे समय तक बात की जा सकती है। उन्होंने अटल जी के साथ काम करने के अपने अनुभव भी साझा किए।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर महापुरुषों की विरासत को सम्मान देने का काम हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। बनारस से शुरू हुए ऐसे कार्यक्रम अब लखनऊ तक पहुंच चुके हैं।
सरकार का कहना है कि प्रदेश में विकास के साथ संस्कृति पर भी बराबर ध्यान दिया जा रहा है। एक तरफ सड़क, अस्पताल और निवेश के काम हो रहे हैं। दूसरी तरफ ऐसे आयोजन कराए जा रहे हैं, जिनसे नई पीढ़ी अपने इतिहास और आदर्शों को समझ सके।
रश्मिरथी पर्व जैसे कार्यक्रमों से युवाओं में इतिहास और राष्ट्र के प्रति रुचि बढ़ सकती है। इससे सांस्कृतिक जुड़ाव मजबूत होगा। आने वाले समय में ऐसे आयोजन और बढ़ सकते हैं। इससे सरकार की छवि विकास के साथ सांस्कृतिक सोच वाली बनेगी और युवाओं को एक नई दिशा मिलेगा।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
Registration NO. UDYAM -UP-24-0043854





