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महिला आरक्षण पर घिरी सरकार,पल्लवी पटेल ने उठाए नियत और नीति पर सवाल

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विधानसभा विशेष सत्र में महिला बिल पर चर्चा करती हुई विधायक डॉ पल्लवी पटेल

महिला आरक्षण पर घिरी सरकार, पल्लवी पटेल ने उठाए नियत और नीति पर सवाल

 

लखनऊ, 30 अप्रैल। राजधानी लखनऊ में गुरुवार को विधानसभा के एकदिवसीय विशेष सत्र में महिला आरक्षण का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। सिराथू से विधायक डॉ. पल्लवी पटेल ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि महिला आरक्षण पर सरकार की नीति और नियत दोनों सही नहीं हैं। उनका आरोप है कि सरकार इस मुद्दे को जानबूझकर टाल रही है और इसे लागू करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही।
डॉ. पल्लवी पटेल ने कहा कि महिला आरक्षण पर चर्चा से पहले यह समझना जरूरी है कि खासकर वंचित समाज की महिलाओं के साथ सरकार का रवैया कैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के सवालों से बचने के लिए अनावश्यक बयानबाजी और प्रचार कर रही है। उनके मुताबिक, सड़कों पर हो रहे विरोध और पुतला दहन जैसे कदम यह दिखाते हैं कि सरकार दबाव में है।
उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि सरकार महिलाओं को आरक्षण देना ही नहीं चाहती। यही वजह है कि इसे जनगणना और परिसीमन जैसे मुद्दों से जोड़कर आगे बढ़ाने के बजाय रोक दिया गया है। अगर सरकार की मंशा साफ होती तो 2023 में पारित विधेयक के बाद आगे की कार्रवाई अब तक हो चुकी होती। लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है।

विधानसभा विशेष सत्र में महिला बिल पर चर्चा करती हुई विधायक डॉ पल्लवी पटेल
डॉ. पटेल ने यह भी कहा कि सरकार को अब चुनावी गणित की चिंता सताने लगी है, इसलिए वह इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रचार कर रही है। उन्होंने साफ कहा कि असली मुद्दा सामाजिक न्याय के आधार पर महिला आरक्षण लागू करना है। उनके मुताबिक, देश और उत्तर प्रदेश की महिलाएं अब जवाब चाहती हैं कि इतने समय बाद भी इस कानून को लागू क्यों नहीं किया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि इस विधेयक में वंचित समुदाय की महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रावधान क्यों नहीं किए गए। उनका कहना है कि इससे साफ होता है कि सरकार महिलाओं के हित में गंभीर नहीं है।
डॉ. पटेल ने यह भी कहा कि सरकार कई बार बड़े फैसले रातों-रात ले लेती है, लेकिन महिला आरक्षण के मामले में देरी समझ से परे है। उन्होंने इसे महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश बताया और कहा कि सरकार उन्हें उनका हक देने से बच रही है।

आगे क्या असर पड़ेगा?

इस बयान के बाद महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। आने वाले समय में विपक्ष इस मुद्दे को और तेज कर सकता है। वहीं सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना है कि वह इस दिशा में ठोस कदम उठाए।
महिला आरक्षण अब सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। इसका असर आने वाले चुनावों में भी देखने को मिल सकता है।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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