लखनऊ।06 मई(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश में अब गो सेवा सिर्फ आस्था का विषय नहीं रही। यह गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला बड़ा जरिया बन गई है। योगी सरकार के दौरान डेयरी सेक्टर तेजी से बढ़ा है। इसका सीधा फायदा किसानों और युवाओं को मिल रहा है। “मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना” और “नंद बाबा दुग्ध मिशन” जैसी योजनाओं ने इस बदलाव को जमीन पर उतारा है। अब प्रदेश के हजारों युवा डेयरी से जुड़कर सालाना 10 से 12 लाख रुपये तक कमा रहे हैं।

सरकार की इन योजनाओं का असर गांवों में साफ दिख रहा है। जहां पहले पशुपालन को छोटा काम माना जाता था, वहीं अब यह सम्मानजनक और स्थायी रोजगार बन चुका है। डेयरी यूनिट खोलकर युवा खुद भी कमा रहे हैं और दूसरों को भी काम दे रहे हैं।
मथुरा जिले के रदोई गांव के रहने वाले देवेन्द्र सिंह इसका उदाहरण हैं। उनका चयन नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत हुआ। उन्होंने मिनी नंदिनी योजना के जरिए आठ साहिवाल और दो गिर नस्ल की गायें खरीदीं। सरकार से उन्हें 50 प्रतिशत तक अनुदान मिला। आज उनकी डेयरी से रोज करीब 100 लीटर दूध निकल रहा है। इससे उनकी आय लगातार बढ़ रही है। देवेन्द्र कहते हैं कि सरकारी मदद से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मौका मिला।
डेयरी सेक्टर में यूपी ने बड़ा रिकॉर्ड भी बनाया है। पशुपालन विभाग के अनुसार, अब देश के कुल दुग्ध उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है। राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को पीछे छोड़कर यूपी देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक बन गया है।
इस बदलाव में स्वदेशी नस्लों का बड़ा योगदान है। साहिवाल और गिर गायें ज्यादा दूध देने के लिए जानी जाती हैं। सरकार ने इन नस्लों को बढ़ावा दिया है। इससे दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है। गांवों में आधुनिक डेयरी यूनिट बन रही हैं, जिससे पशु आहार, दूध संग्रहण, ट्रांसपोर्ट और मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में भी काम बढ़ा है।
सबसे बड़ा असर रोजगार पर पड़ा है। बड़ी संख्या में युवा अब गांव में ही काम कर रहे हैं। पहले जहां रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन होता था, अब वह कम हो रहा है। डेयरी सेक्टर ने गांवों में ही कमाई का मजबूत साधन तैयार किया है।
अधिकारियों का कहना है कि यह सब योजनाबद्ध तरीके से किया गया विकास है। सरकार ने युवाओं को डेयरी से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में काम किया है। यही वजह है कि अब गांवों में आय बढ़ रही है और जीवन स्तर भी सुधर रहा है।
ग्रामीण युवाओं का भी कहना है कि पहले पशुपालन से ज्यादा कमाई की उम्मीद नहीं होती थी। लेकिन अब यही काम बड़ा व्यवसाय बन गया है। कई युवा डेयरी यूनिट खोलकर दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं।
आगे क्या असर होगा
आने वाले समय में डेयरी सेक्टर और मजबूत होने की उम्मीद है। अगर इसी तरह योजनाएं जमीन पर लागू होती रहीं तो उत्तर प्रदेश गांव आधारित अर्थव्यवस्था का बड़ा मॉडल बन सकता है। इससे न सिर्फ रोजगार बढ़ेगा, बल्कि राज्य की आर्थिक स्थिति भी और बेहतर होगी।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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