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कम मानसून की आशंका के बीच यूपी की बड़ी तैयारी, धान की खेती में डीएसआर तकनीक पर रहेगा खास जोर

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लखनऊ,30 मई(चौथा प्रहरी)।उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ सीजन 2026 को लेकर विशेष तैयारी शुरू कर दी है। नई दिल्ली के पूसा परिसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन “खरीफ अभियान-2026” में प्रदेश की रणनीति प्रस्तुत की गई। सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की। इसमें विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, कृषि विशेषज्ञ और अधिकारी शामिल हुए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बार जलवायु परिवर्तन और संभावित कमजोर मानसून को ध्यान में रखते हुए खरीफ अभियान की रूपरेखा तैयार की है। सरकार का उद्देश्य किसानों को ऐसी कृषि तकनीकों से जोड़ना है, जिनसे कम पानी और बदलते मौसम की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सके।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने वर्ष 2026 में सामान्य से कम मानसून और एल-नीनो के प्रभाव के कारण अनियमित बारिश की संभावना जताई है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार धान की खेती में डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) यानी सीधी बुवाई तकनीक को बढ़ावा दे रही है। कृषि विभाग के अनुसार इस तकनीक से पारंपरिक रोपाई की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। साथ ही फसल 15 से 20 दिन पहले तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को अगली रबी फसल की तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल जाता है।

खेत में डीएसआर तकनीक से धान की बुवाई करते किसान
खरीफ सीजन की तैयारियों के तहत कृषि विभाग किसानों को समय पर प्रमाणित बीज, उर्वरक और तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रहा है। गांव और ग्राम पंचायत स्तर पर किसान गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों में किसानों को सूखा प्रबंधन, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण और मृदा संरक्षण से जुड़ी जानकारी दी जा रही है।
केंद्र सरकार के ‘खेत बचाओ’ अभियान के तहत किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। इससे खेती की लागत कम करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
प्रदेश सरकार दलहन, तिलहन और मिलेट्स के उत्पादन को बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए किसानों को निःशुल्क मिनीकिट और अनुदानित दरों पर उन्नत बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। कृषि विभाग का कहना है कि प्रदेश में उन्नत बीज, उर्वरक और कृषि रक्षा रसायनों का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
सरकार का मानना है कि यदि किसान नई तकनीकों को अपनाते हैं और उपलब्ध योजनाओं का लाभ उठाते हैं तो कम मानसून जैसी चुनौतियों के बावजूद उत्पादन प्रभावित नहीं होगा। आने वाले समय में जल संरक्षण आधारित खेती और फसल विविधीकरण की यह रणनीति किसानों की आय बढ़ाने के साथ प्रदेश को दलहन, तिलहन और मिलेट्स उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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