लखनऊ, 1 जून( चौथा प्रहरी)। रेलवे में हो रहे संरचनात्मक बदलाव और निजीकरण को लेकर देशभर के कुलियों ने अपनी आजीविका और सामाजिक सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। राष्ट्रीय कुली मोर्चा की वर्चुअल बैठक में मांग की गई कि रेलवे में यात्रियों का सामान ढोने से जुड़े कार्यों में कुलियों के रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही रेल मंत्रालय द्वारा कुलियों की स्थिति पर कराए गए सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग उठी।
बैठक में कहा गया कि रेलवे स्टेशनों पर बैटरी रिक्शा संचालन, ट्रॉली के जरिए सामान ढुलाई और माई कुली एप जैसी व्यवस्थाओं को निजी कंपनियों के बजाय कुलियों की सहकारी समितियों को सौंपा जाना चाहिए। मोर्चा का कहना है कि इससे रोजगार भी सुरक्षित रहेगा और इन सेवाओं से होने वाला लाभ सीधे कुलियों तक पहुंचेगा।

राष्ट्रीय कुली मोर्चा के कोऑर्डिनेटर राम सुरेश यादव ने कहा कि रेलवे में हो रहे बदलावों के कारण कुलियों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो रहा है। उनका आरोप है कि निजी कंपनियों को बढ़ावा देने वाली नीतियों से कुलियों की पारंपरिक आजीविका प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि सामान ढुलाई से जुड़े कामों में निजी एजेंसियों की बढ़ती भूमिका से हजारों कुलियों के सामने रोजी-रोटी का सवाल खड़ा हो गया है।
बैठक में यह भी मांग रखी गई कि यदि सरकार इन सेवाओं को सहकारी समितियों को नहीं सौंपती है तो कुलियों को रेलवे की नौकरी में समायोजित किया जाए। मोर्चा का तर्क है कि कुली लंबे समय से रेलवे व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं, इसलिए उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
वर्चुअल बैठक में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से यह अनुरोध भी किया गया कि कुलियों के बच्चों की शिक्षा, परिवार के स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कराए गए सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। बैठक में शामिल सदस्यों का कहना था कि सरकार की ओर से कई बार सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई योजनाओं का लाभ कुलियों तक नहीं पहुंच रहा है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि इस विषय पर देशभर में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत जानकारी मांगी जाएगी। इसके जरिए सरकार से सर्वे रिपोर्ट और कुलियों के कल्याण से जुड़े कदमों की जानकारी प्राप्त की जाएगी।
बैठक का संचालन सह-कोऑर्डिनेटर चंदेश्वर मुखिया ने किया। इसमें विभिन्न राज्यों से जुड़े कुली प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया तथा रोजगार सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों पर अपने विचार रखे।
आने वाले समय में रेलवे में निजीकरण और तकनीकी बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो कुलियों के रोजगार का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में सरकार, रेलवे प्रशासन और कुली संगठनों के बीच संवाद से ही कोई स्थायी समाधान निकलने की संभावना दिखाई देती है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
Registration NO. UDYAM -UP-24-0043854





