(विनय प्रकाश सिंह)
लखनऊ,04जून(चौथा प्रहरी)।उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में सबसे बड़ी संख्या पीसीएस अधिकारियों की है, लेकिन इन दिनों बड़ी संख्या में एसडीएम रैंक के अधिकारी अपने तबादलों को लेकर असमंजस में हैं। प्रदेश के कई जिलों में तीन साल या उससे अधिक समय पूरा कर चुके सैकड़ों पीसीएस अधिकारी नए तबादला आदेश का इंतजार कर रहे हैं। लंबे समय से आदेश न आने के कारण अधिकारियों में निराशा बढ़ रही है।

जानकारी के मुताबिक कई एसडीएम अपने वरिष्ठ अधिकारियों को यह बता चुके हैं कि उनका स्थानांतरण कभी भी हो सकता है। ऐसे में वे न तो नए काम की लंबी योजना बना पा रहे हैं और न ही निजी स्तर पर जरूरी फैसले ले पा रहे हैं। कई अधिकारियों के सामने बच्चों के स्कूल में दाखिले और परिवार के स्थानांतरण जैसी समस्याएं भी खड़ी हैं।
दूसरी ओर जिलाधिकारियों की चिंता भी कम नहीं है। कई जिलों में प्रशासनिक जरूरतों के हिसाब से नए एसडीएम की तैनाती का इंतजार किया जा रहा है। जिलाधिकारी चाहते हैं कि समय पर नई नियुक्तियां हों ताकि तहसीलों में कार्यों का सही बंटवारा किया जा सके और सरकारी योजनाओं व विकास कार्यों की गति बनी रहे।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि एसडीएम स्तर के तबादलों की प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई है। इसके कारण अधिकारियों और जिला प्रशासन दोनों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। जिन अधिकारियों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, वे नई तैनाती की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि जिन जिलों में रिक्तियां बनने वाली हैं वहां भी अनिश्चितता बनी हुई है।
तबादलों के अलावा पीसीएस अधिकारियों की एक और बड़ी समस्या प्रमोशन से जुड़ी हुई बताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि उच्च वेतनमान और वरिष्ठ पदों पर बड़ी संख्या में रिक्तियां मौजूद हैं, लेकिन पदोन्नति की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 12,000 ग्रेड पे के 10 पद स्वीकृत हैं और सभी 10 पद खाली पड़े हैं। इसी तरह 10,000 ग्रेड पे के 65 पदों में केवल 5 पद भरे हैं जबकि 60 पद रिक्त हैं। 8,900 ग्रेड पे के 110 पदों में सिर्फ 1 पद पर अधिकारी तैनात है और 109 पद खाली हैं। वहीं 8,700 ग्रेड पे के 200 पदों में केवल 4 पद भरे हुए हैं जबकि 196 पद रिक्त बताए जा रहे हैं।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते तबादलों और पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी की जाती है तो अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा और प्रशासनिक कार्यों में भी तेजी आएगी। आने वाले समय में सरकार द्वारा इन लंबित मामलों पर निर्णय लिए जाने की उम्मीद की जा रही है, क्योंकि इसका सीधा असर जिलों के प्रशासनिक संचालन और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ सकता है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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