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UP NEWS: यूपी की 3 डिजिटल पंचायत पहलें राष्ट्रीय संकलन में शामिल, ग्रामीण सुशासन के मॉडल को मिली देशभर में पहचान

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लखनऊ,04 जून(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश के पंचायती राज विभाग को बड़ी राष्ट्रीय पहचान मिली है। भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा जारी ‘नेशनल कंपेंडियम’ में उत्तर प्रदेश की तीन डिजिटल और प्रशासनिक पहलों को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन और पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर के नेतृत्व में लागू की गई इन योजनाओं को ग्रामीण सुशासन और डिजिटल बदलाव के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

उत्तर प्रदेश के ग्राम सचिवालय में डिजिटल सेवाओं का उपयोग करते ग्रामीण और कर्मचारी"
पंचायती राज विभाग की जिन तीन पहलों को राष्ट्रीय संकलन में जगह मिली है, उनमें एआई आधारित पंचायत गेटवे पोर्टल, ग्राम सचिवालयों में आधार केंद्रों की स्थापना और डिजिटल वित्तीय एवं राजस्व प्रबंधन प्रणाली शामिल हैं। विभाग का दावा है कि इन योजनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में पारदर्शिता बढ़ाई है और सरकारी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान बनाया है।
एआई आधारित पंचायत गेटवे पोर्टल के तहत ग्राम सचिवालयों में फेशियल रिकग्निशन और जियो-फेंसिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस व्यवस्था में सचिव, ग्राम प्रधान या पंचायत सहायक की डिजिटल उपस्थिति दर्ज होने के बाद ही विकास कार्यों से जुड़े भुगतान किए जा सकते हैं। इससे वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने और अनियमितताओं को रोकने में मदद मिली है।

यूपी के ग्राम सचिवालय में डिजिटल सेवाओं का उपयोग करती महिला कर्मचारी का प्रतीकात्मक चित्र
दूसरी पहल के रूप में ग्राम सचिवालयों को आधार नामांकन और अपडेट केंद्रों के रूप में विकसित किया गया है। इससे ग्रामीणों को आधार कार्ड से जुड़े कार्यों के लिए शहरों और तहसीलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को विशेष सुविधा मिली है। साथ ही पंचायत सहायकों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी बने हैं।
तीसरी पहल पंचायतों की वित्तीय मजबूती से जुड़ी है। राज्य में राजस्व संग्रह और बैंक मिलान की प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है। विभाग के अनुसार इससे कर संग्रह में पारदर्शिता आई है, टैक्स चोरी पर रोक लगी है और पंचायतों की अपनी आय बढ़ी है। इससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों के लिए पंचायतों की क्षमता मजबूत हुई है।
पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस उपलब्धि को प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार “डिजिटल पंचायत-सशक्त पंचायत” के लक्ष्य को जमीन पर उतार रही है और केंद्र सरकार द्वारा इन योजनाओं को राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्वीकार किया जाना इसकी पुष्टि करता है।
पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने कहा कि “विकसित पंचायत से विकसित भारत” के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए विभाग लगातार काम कर रहा है। उनके अनुसार राष्ट्रीय संकलन में स्थान मिलना विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत की पहचान है।
यह उपलब्धि केवल एक प्रशासनिक सम्मान नहीं है, बल्कि ग्रामीण शासन व्यवस्था में हो रहे बदलाव का संकेत भी है। यदि इन मॉडलों का विस्तार और प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहा तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की पंचायतें अधिक आत्मनिर्भर, पारदर्शी और तकनीक आधारित बन सकती हैं। साथ ही अन्य राज्यों के लिए भी यह एक उपयोगी मॉडल साबित हो सकता है।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

Registration NO. UDYAM -UP-24-0043854

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