(सौरभ सोमवंशी)
अयोध्या/नई दिल्ली,07जून(चौथा प्रहरी)। सामाजिक कार्यकर्ता और भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा मामले में हिंदुओं की अधिवक्ता रीना एन सिंह ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, प्रतिनिधित्व और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से राम मंदिर के प्रबंधन की जांच कराने और आवश्यकता पड़ने पर इसे अपने नियंत्रण में लेने की मांग की है।

रीना एन सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम सूर्यवंशी क्षत्रिय थे और अयोध्या की गौरवशाली परंपरा क्षत्रिय समाज से गहराई से जुड़ी रही है। उनका कहना है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को स्थान दिया गया है, लेकिन क्षत्रिय समाज का प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने इस पर पुनर्विचार की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि इतिहास में क्षत्रिय समाज ने हमेशा समाज और राष्ट्र के लिए योगदान दिया है। ऐसे में श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े सर्वोच्च संस्थान में सभी प्रमुख सामाजिक वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विचार होना चाहिए।
रीना एन सिंह ने ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने कहा कि समय-समय पर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और वित्तीय मामलों को लेकर विभिन्न सवाल उठते रहे हैं। रामभक्तों की आस्था को देखते हुए ट्रस्ट से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक रूप से सामने रखा जाना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की कि यदि वित्तीय अनियमितताओं या अन्य गड़बड़ियों के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। साथ ही जांच में सामने आने वाले तथ्यों को भी सार्वजनिक किया जाए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
रीना एन सिंह ने कहा कि मंदिर से जुड़े सभी निर्णयों में श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका मानना है कि इससे रामभक्तों के बीच भरोसा और मजबूत होगा।
गौरतलब है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का गठन अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण, संचालन और प्रबंधन की देखरेख के लिए किया गया था। ट्रस्ट में धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्रों से जुड़े सदस्य शामिल हैं। हालांकि, रीना एन सिंह का कहना है कि इसमें क्षत्रिय समाज को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है।
आने वाले समय में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और प्रतिनिधित्व को लेकर उठे ये सवाल चर्चा का विषय बन सकते हैं। यदि जांच या समीक्षा की कोई प्रक्रिया शुरू होती है तो उसका असर राम मंदिर प्रबंधन और उससे जुड़े निर्णयों पर भी पड़ सकता है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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