लखनऊ, 9 जून(चौथा प्रहरी)। अपराधों की जांच में वैज्ञानिक तरीकों के बढ़ते महत्व को देखते हुए लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) में मंगलवार को 48 प्रशिक्षु अधिकारियों ने अध्ययन भ्रमण किया। ये अधिकारी डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। भ्रमण का उद्देश्य अधिकारियों को साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना था।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल अधिकारी स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग, राज्य कर विभाग तथा कोषागार विभाग से जुड़े हैं। संस्थान के विशेषज्ञों ने उन्हें साइबर अपराधों की जांच, डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण और फॉरेंसिक तकनीकों के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी।

अधिकारियों ने संस्थान की विभिन्न प्रयोगशालाओं का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने डीएनए लैब और ड्रोन तकनीक से जुड़े कार्यों को करीब से समझा। विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक जांच में इन तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है और कई मामलों के खुलासे में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी. के. गोस्वामी ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और यही अपराधी को सजा तक पहुंचाने का आधार बनते हैं।
डॉ. गोस्वामी ने प्रशिक्षु अधिकारियों से प्रशिक्षण अवधि का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जितनी अधिक जिज्ञासा होगी, उतना अधिक सीखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि साइबर युग में अपराधों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले अधिकांश अपराध भौतिक रूप से होते थे, लेकिन अब डिजिटल माध्यमों से होने वाले अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों के लिए तकनीक की समझ विकसित करना बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम के अंत में उप निदेशक जितेंद्र श्रीवास्तव ने सभी अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी ने किया। इस अवसर पर पुलिस उप महानिरीक्षक हेमराज मीना, उप निदेशक चिरंजीब मुखर्जी, अतुल यादव, डॉ. मनीष राय, डॉ. पलक, उप निरीक्षक आर. शैलेन्द्र सिंह, कार्तिकेय सहित कई अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
जानकारों का मानना है कि भविष्य में साइबर अपराधों की चुनौतियां और बढ़ेंगी। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों को फॉरेंसिक और डिजिटल जांच की समझ देने वाले इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम शासन की अपराध नियंत्रण और प्रभावी जांच व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद करेंगे।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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