लखनऊ,20 जून(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश के आयुष्मान कार्डधारकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब आयुष्मान कार्ड से जुड़ी कई समस्याओं के समाधान के लिए लोगों को लखनऊ स्थित राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (साचीज) के कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर ऐसी व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत कार्ड अप्रूवल, रिजेक्शन और कार्ड डिसेबल जैसी प्रक्रियाओं का निस्तारण जिला स्तर पर ही किया जा सकेगा।

इस नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ), नोडल आयुष्मान अधिकारियों और जिला कार्यान्वयन इकाइयों को विशेष तकनीकी आईडी उपलब्ध कराई गई है। इसके जरिए जिला स्तर के अधिकारी सीधे तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा कर सकेंगे। इससे लाभार्थियों को अपनी समस्याओं का समाधान जल्दी मिलेगा और समय व धन दोनों की बचत होगी।
साचीज की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्चना वर्मा ने बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि आयुष्मान भारत योजना का लाभ पात्र लोगों तक बिना किसी परेशानी के पहुंचे। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण और प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर लगातार काम किया जा रहा है। नई व्यवस्था इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रदेश में दावा निस्तारण और भुगतान प्रक्रिया को भी तेज और पारदर्शी बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। साचीज के अनुसार वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में आयुष्मान योजना के क्लेम निस्तारण और भुगतान का औसत समय लगभग 57 दिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 73 दिन है। यह दिखाता है कि प्रदेश में भुगतान और प्रशासनिक प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज गति से संचालित हो रही है। वर्तमान में लगभग 500 करोड़ रुपये की देयता लंबित है, जिसे नियंत्रित स्तर पर बताया गया है।
अस्पतालों को समय पर भुगतान और मरीजों को बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के लिए एजेंसी लगातार सुधार कर रही है। कई बार अस्पतालों की ओर से जरूरी दस्तावेज अधूरे या देरी से जमा किए जाने के कारण क्लेम अस्वीकृत हो जाते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए अस्पतालों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इनमें सही तरीके से क्लेम दाखिल करने, आवश्यक दस्तावेजों और मानक उपचार दिशानिर्देशों की जानकारी दी जा रही है।
साथ ही योजना की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए निगरानी भी सख्त की गई है। वित्तीय वर्ष के दौरान गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं करने और विभिन्न अनियमितताओं के कारण करीब 200 अस्पतालों को योजना से बाहर कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि केवल उन्हीं अस्पतालों को योजना में बनाए रखा जाएगा जो लाभार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध करा रहे हैं।
इसके अलावा लगभग 300 अस्पतालों को भी चिन्हित किया गया है, जिनके खिलाफ अपकोडिंग या संदिग्ध दावों के जरिए अनुचित भुगतान लेने की आशंका जताई गई है। इन अस्पतालों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और उनका फील्ड ऑडिट कराया जा रहा है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा आयुष्मान कार्डधारकों को मिलेगा। जिला स्तर पर अधिकार बढ़ने से समस्याओं का समाधान तेज होगा, अस्पतालों को भुगतान प्रक्रिया में सुविधा मिलेगी और योजना की पारदर्शिता भी मजबूत होगी। इससे आयुष्मान भारत योजना का लाभ जरूरतमंद लोगों तक और अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचने की उम्मीद है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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